आईपीएस अधिकारी मधुकर शेट्टी की मौत की जांच के लिए कमेटी बनी

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मधुकर शेट्टी
फाइल फोटो

हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकेडमी के उप निदेशक और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी मधुकर शेट्टी की मौत की जांच के लिए कर्नाटक सरकार ने पांच महीने बाद कमेटी का गठन किया है. इस मेडिकल कमेटी की जांच के नतीजे के आधार पर तय किया जायेगा कि इस केस की न्यायिक जांच करवाने की ज़रुरत है या नहीं. मेडिकल कमेटी के अध्यक्ष जाने माने हृदयरोग विशेषज्ञ डॉक्टर देवी शेट्टी हैं. पांच सदस्यों वाली इस कमेटी के गठन के बारे में राज्य सरकार ने हाल ही में अधिसूचना जारी की है. कमेटी के संयोजक चिकित्सा शिक्षा निदेशक पीजी गिरीश हैं.

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने वाले 1999 बैच के आईपीएस अधिकारी मधुकर शेट्टी की गिनती बेहतरीन और लोकप्रिय पुलिस अधिकारियों में की जाती थी. वह 47 बरस के थे और उन्हें इलाज के लिए हैदराबाद के कॉन्टिनेंटल अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहाँ 28 दिसम्बर 2018 को उनकी मौत हो गई थी. बताया गया था कि उन्हें स्वाइन फ्लू (H1N1) हुआ है. हालांकि उनके इलाज पर कर्नाटक और तेलंगाना के वरिष्ठ अधिकारी भी नज़र रख रहे थे लेकिन मधुकर शेट्टी के परिवार और मित्रों ने संदेह ज़ाहिर किया था कि इलाज में गड़बड़ हुई है.

मधुकर शेट्टी की पत्नी सुवर्णा ने इसी साल की शुरुआत में कर्नाटक के गृह मंत्री एमबी पाटिल से मुलाक़ात करके, जांच कराने की मांग की थी क्यूंकि शेट्टी की मौत को लेकर सवाल उठ रहे थे. कहा जा रहा था कि उन्हें स्वाइन फ्लू हुआ ही नहीं था लेकिन इलाज स्वाइन फ्लू का चल रहा था. सुवर्णा पति की मृत्यु का सही कारण जानना चाहती हैं. ये कारण स्वाइन फ्लू हैं या हृदय रोग. इस मामले में मदद के लिए सुवर्णा राज्य के पुलिस महानिदेशक नीलमणि राजू से भी मिली थीं.

असल में, शेट्टी की मृत्यु और इलाज को लेकर तरह तरह की अफवाहें फ़ैल रही थीं. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मीडिया सलाहकार और मधुकर शेट्टी के मित्र दिनेश अमीन मट्टू ने भी इस मामले में रुचि दिखाई थी. उन्होंने सरकार के फैसले का स्वागत किया है.

पत्रकार पिता की सन्तान मधुकर शेट्टी ने अमेरिका से पीएचडी की डिग्री भी ली थी. चिकमंगलुरु में पुलिस अधीक्षक के तौर पर तैनाती के दौरान वह लोगों के बीच खूब लोकप्रिय हुए थे. उन्होंने विधवा पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन तक दिलाने में लोगों को मदद की. हैरानी की बात तो ये है कि लोगों ने उनके और तत्कालीन ज़िला उपायुक्त हर्ष गुप्ता के नाम पर एक गाँव का नामकरण “गुप्ता शेट्टी गाँव” भी कर दिया था.

असल में मधुकर शेट्टी और हर्ष गुप्ता ने मिलकर न सिर्फ एक अमीर कॉफ़ी उत्पादक किसान के कब्जे से सरकारी ज़मीन खाली करवाई थी बल्कि आरक्षित वन क्षेत्र से हटाये गये 32 दलित परिवारों को ज़मीन बाँट भी दी थी.

स्वाइन फ्लू से पीड़ित आईपीएस अधिकारी के मधुकर शेट्टी का निधन

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