हरियाणा पुलिस के कपिल ठाकुर ने अलग अंदाज से रिकॉर्ड बनाया

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कपिल ठाकुर
माउंट एवरेस्ट फतेह करने के बाद एएसआई कपिल ठाकुर.

एकबारगी तो यकीन करना मुश्किल है कि हरियाणा पुलिस के सहायक पुलिस निरीक्षक कपिल ठाकुर ने जो किया वो किसी इंसान के लिए करना मुमकिन है. उन्होंने एक देश की राजधानी से दूसरे देश की राजधानी तक साइकिल चलाई और फिर दुनिया की सबसे ऊँची पर्वतीय चोटी के बेस कैम्प तक पहुंचे और इतना ही नहीं साइकिल चलाकर ही अपने वतन की राजधानी लौटे. ऐसा करके 36 वर्षीय कपिल ठाकुर ने सिर्फ नया विश्व रिकार्ड कायम किया बल्कि एक बार फिर अपने सूबे के बारे में कही जाने वाली कहावत को सामयिक साबित किया, ‘ देसां में देस हरियाणा, जित दूध दही का खाणा’.

कपिल ठाकुर
एएसआई कपिल ठाकुर का नोटों की माला पहनाकर स्वागत किया गया.

हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना में उत्तम नगर के रहने वाले एएसआई कपिल ठाकुर यह कारनामा करने के बाद 12 मई को लौटे हैं और खुद को चुनौती देने वाले अपने इस अभियान से बेहद खुश हैं. 2003 में हरियाणा पुलिस में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए कपिल ठाकुर को बचपन से ही साइकिल चलाने का शौक पैदा हुआ और हालत ये हो गई कि पुलिस की नौकरी मिलने के बाद तो ये उनका जुनून बन गया. एएसआई कपिल ने रक्षक न्यूज़ डॉट इन को बताया, ‘मैं रोजाना ड्यूटी पर अपने गाँव बवाना से पानीपत साइकिल पर ही जाता था जो 50 किलोमीटर है जिसमें करीब 2 घंटे लगते थे’. यानि कपिल ठाकुर 100 किलोमीटर की साइक्लिंग करते थे.

कपिल ने 2011 में पर्वतारोहण शुरू किया था. 2013 में पीर पंजाल की चोटी पर तिरंगे के साथ साथ उन्होंने हरियाणा पुलिस का भी झण्डा फहराया था और उनकी इस कामयाबी का सिला तरक्की के तौर पर भी मिला. कपिल ठाकुर को हवलदार से एएसआई बना दिया गया. इससे पहले 2010 विभागीय परीक्षा पास करके सिपाही से वो हवलदार बने.

विभिन्न चोटियों को फतेह कर चुके कपिल ठाकुर दरअसल एवरेस्ट कुछ अलग अंदाज़ से जीतना चाहते थे. वह 5 अप्रैल को राजधानी दिल्ली में युद्ध स्मारक इंडिया गेट से साइकिल पर रवाना हुए और 9 दिन का सफर तय करके नेपाल की राजधानी काठमांडू में 14 अप्रैल को पहुंचे लेकिन इस रास्ते में वो सबको पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा का संदेश देते गये. एएसआई कपिल ठाकुर साइकिल चलाने को सेहत के लिए बेहतरीन व्यायाम भी बताते हैं. वो लोगों को शहरों में साइकिल चलाने को भी प्रेरित करते हैं. कपिल 16 अप्रैल को बेस कैंप के लिए चले थे. 4 मई को वापस काठमांडू आने के बाद अगले दिन वह साइकिल से दिल्ली के लिए रवाना हुए जहाँ 12 मई को पहुंचे.

हरियाणा पुलिस के एएसआई कपिल ठाकुर ने ये जबरदस्त अभियान अपने और अपने कुछ साथियों के बूते पर पूरा किया जिस पर तकरीबन 5 लाख रुपये का खर्च आया. दो लाख रुपये उन्हें लोगों ने दिए बाकी उन्होंने अपने पास से खर्च करके ये विश्व रिकार्ड बनाया है जिसने हरियाणा और भारत का नाम रोशन किया है. तीन बच्चों के पिता कपिल ठाकुर जब गोहाना पहुंचे तो परिवार तो बेहद खुश था ही उनके मिलने जुलने वाले भी फूले नहीं समा रहे थे. यहाँ पहुँचने पर मंगलवार को समाजसेवी नरेन्द्र गहलावत, राजेन्द्र टोकिया और किशनलाल के साथ लोगों ने स्वागत किया.