असल में हुआ यह कि विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि वे पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के कुछ अंशों के जरिए चीन से संघर्ष के बारे में बताना चाहते हैं। हालांकि, इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जो किताब छपी ही नहीं है, राहुल गांधी उसका जिक्र सदन में किस तरह कर सकते हैं? और वे इसके सत्यापन के लिए क्या सबूत देंगे ?
इसके बाद ही लोकसभा में नियमों और कायदों को लेकर बहस छिड़ गई . सदन की कार्यवाही पहले 3 बजे तक के लिए स्थगित दी गई. फिर जब 3 बजे कार्यवाही शुरू हुई तब भी हंगामा जारी रहा. इसके बाद सदन की कार्यवाही को एक घंटा और स्थगित कर 4 बजे का समय रखा गया . आखिरकार जब 4 बजे भी इस मुद्दे की चर्चा पर हल नहीं निकल सका, तो सदन को 3 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
ऐसे में एक सवाल जो सबके मन में है, वह यह कि है भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की जिस अप्रकाशित किताब को लेकर इतना बवाल हो रहा है वो आखिर है क्या… ! इसके किस अंश को राहुल गांधी संसद सदन में पढ़ना चाह रहे थे. नरवणे की यह किताब क्या है, दरअसल इसे लेकर सार्वजनिक तौर पर अलग अलग जानकारी मौजूद है? कारवां मैगज़ीन ने इस पर ताज़ा लेख छापा है , इससे पहले समाचार एजेंसी पीटीआई ने भी कित्याब के कुछ अंशों को सार्वजनिक किया था .
यह किताब भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा- ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (four stars of destiny ) है जिसका प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस की ओर से किया जाना था और जनरल नरवणे ने इसमें भारत-चीन के बीच जून 2020 से शुरू हुए तनाव और इसके पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिसंबर 2023 में इस किताब के प्रकाशन के लिए तय तारीख से कुछ समय पहले ही इसके अंशों का जिक्र किया था. वैसे , कुछ दिन बाद ही यह सामने आया कि भारतीय सेना प्रकाशन से पहले इस किताब की समीक्षा कर रही है. दरअसल, किसी भी सैन्य अधिकारी/कर्मी/सेना के मामलों से जुड़ी किसी भी किताब या दस्तावेज के प्रकाशन से पहले इस तरह की मंजूरी अनिवार्य है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने जनरल नरवणे की किताब के जिन हिस्सों को प्रकाशित किया था, उनमें पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (line of actual control) पर रेचिन ला पर्वत दर्रे पर चीन की सेना और टैंकों का जिक्र था. इन अंशों में बताया गया कि जब चीन की ओर से यह गतिविधियां की जा रही थी, उस दौरान एमएम नरवणे ने चीन-भारत की सेना के बीच हुई तनाव की स्थिति पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , विदेश मंत्री एस जयशंकर , राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ जनरल बिपिन रावत रक्षा से फोन पर संपर्क करके बातचीत की थी. लेकिन उनको स्पष्ट निर्देश नहीं मिल रहे थे कि करना क्या है ?
इन प्रकाशित अंशों में जनरल नरवणे के हवाले से लिखा गया था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ फोन पर बातचीत के बाद दिमाग में कई अलग-अलग विचार दौड़ रहे थे. नरवणे ने लिखा कि मैंने रक्षा मंत्री को स्थिति की गंभीरता की जानकारी दी. साथ ही उन्होंने कहा कि उस दौरान पीएम ( प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ) से भी बात की थी. उन्होंने कहा था कि यह पूरी तरह से एक सैन्य निर्णय है, ‘जो उचित समझो वो करो’.
उन्होंने लिखा कि मैं आर्मी हाउस में था, एक दीवार पर जम्मू-कश्मीर और लदाख का नक्शा था, दूसरी दीवार पर पूर्वी कमान का. वे अचिह्नित नक्शे थे, लेकिन जैसे ही मैंने उन्हें देखा, मैं प्रत्येक इकाई के स्थान की कल्पना कर सकता था. हम हर हम हर तरह से तैयार थे, लेकिन क्या मैं वास्तव में युद्ध शुरू करना चाहता था? ये सवाल मन में था. ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में जनरल नरवणे उस रात की घटना को लेकर मन में आए विचारों का उल्लेख किया.
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 31 दिसंबर, 2019 से 30 अप्रैल, 2022 तक 28वें सेना प्रमुख (chief of army staff ) के रूप में काम किया. उन्होंने चीन के साथ सीमा पर हुई झड़पों के दौरान सेना का नेतृत्व किया, जिसमें गलवान घाटी की झड़प भी शामिल है, जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की जान गई थी और चीनी सैनिकों की संख्या का खुलासा नहीं किया गया. उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ लिखी, जिसे 2024 में प्रकाशित किया जाना था. किताब का लिंक अभी भी एमेज़ोन (amazon) पर मौजूद है, लेकिन उस पर किताब के बारे ,में “अभी उपलब्ध नहीं है” का संदेश दिख रहा है.













