विंग कमांडर जगदीश प्रसाद बडूनी ने 17 लाख रुपये स्कूल को देकर टीचर पत्नी को दी श्रद्धांजलि

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विंग कमांडर जगदीश प्रसाद बडूनी
विंग कमांडर (रिटायर्ड) जगदीश प्रसाद बडूनी अपनी पत्नी (स्व.) विधू बडूनी के साथ. फोटो साभार : पूनम एस राजपाल के फेसबुक वाल से

फौजियों के देश और वर्दी के प्रति प्रेम और जज्बात को किसी गैर सैनिक के लिए समझ पाना आसान नहीं है लेकिन भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए विंग कमांडर जगदीश प्रसाद बडूनी के जज़्बात को तो पारिभाषित कर पाना, समझना और समझा पाना तो सच में बेहद कठिन है.

उन्होंने अपनी स्वर्गवासी पत्नी विधू बडूनी को इस तरह की श्रद्धांजलि अर्पित की है कि उन्हें अपने ही नहीं वे गैर भी उन्हें भुला नहीं सकते जो उनके किये इस काम को जानेंगे. ख़ासतौर से वे लोग जो वायु सेना या दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित वायु सेना के स्कूल एयरफ़ोर्स गोल्डन जुबली इंस्टिट्यूट से जुड़े हैं या जुड़ेंगे.

विंग कमांडर जगदीश प्रसाद बडूनी की पत्नी विधू बडूनी इस स्कूल में प्राइमरी टीचर थीं और इसी 6 साल फरवरी को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था. विधू ने यहाँ 1986 से 21 साल तक सेवा की और इस दौरान स्कूल से प्राप्त वेतन आदि से उनकी बचत के 17 लाख रुपये जमा हुए. विंग कमांडर बडूनी ने हाल ही में स्कूल में हुए एक कार्यक्रम के दौरान ये सारी धनराशि स्कूल और इसके छात्रों पर खर्च के लिए दान करने की घोषणा की.

विंग कमांडर जगदीश प्रसाद बडूनी
स्व. विधू बडूनी. फोटो साभार : पूनम एस राजपाल के फेसबुक वाल से

एयरफ़ोर्स गोल्डन जुबली इंस्टिट्यूट की प्रिंसिपल पूनम एस रामपाल ने बताया कि विंग कमांडर बडूनी की तरफ से दान किये गये 17 लाख रूपये में से 10 लाख रुपये पांचवीं से ग्यारहवीं कक्षा के मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति के तौर पर देने के लिए रखे जायेंगे. बाकी धनराशि स्कूल के प्राइमरी विंग के ढांचागत विकास कार्य में खर्च की जाएगी.

स्कूल को 17 लाख रुपये का चेक भेंट करते वक्त पत्नी को याद करते भावुक लम्हों के बीच विंग कमांडर बडूनी ने कहा कि ये संस्थान उनकी पत्नी विधू बडूनी के दिल के बेहद करीब था जहां वो इतने साल बच्चों को पढ़ाती रहीं. उन्होंने बताया कि ये पैसा इतने बरसों में मिले वेतन से ही बचाकर इकट्ठा किया गया था. विंग कमांडर (रिटायर्ड) जगदीश प्रसाद बडूनी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है इस पैसे का स्कूल और छात्रों के कल्याण के वास्ते खर्च किया जाना उनकी तरफ से प्रिय पत्नी को दी गई उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी.

विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित जगदीश प्रसाद बडूनी :

विंग कमांडर जगदीश प्रसाद बडूनी
विंग कमांडर (रिटायर्ड) जगदीश प्रसाद बडूनी की युवावस्था की फोटो.

रिटायर्ड विंग कमांडर जे पी बडूनी ऐरोनोटिकल इंजीनियर हैं. 21 साल की उम्र में उन्होंने नवम्बर 1962 में वायुसेना की एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (मकेनिकल) ब्रांच में कमीशन हासिल किया. बतौर स्क्वाड्रन लीडर वह मई 1971 से भारतीय वायु सेना के सेन्ट्रल रिपेयर व सर्विसिंग सेक्शन के प्रभारी अधिकारी रहे. सिर्फ 6 महीने के कम अरसे में ही उन्होंने सभी तरह के विमानों की सर्विसिंग, उनकी गडबडियों को पता लगा कर उन्हें दुरुस्त करने में महारत हासिल कर ली थी. उन्होंने जब सेन्ट्रल रिपेयर व सर्विसिंग सेक्शन का काम सम्भाला तब विमानों की सर्विसिंग की स्थिति बेहद खराब थी. ऐसे विमानों की बड़ी संख्या थी जो अरसे से बिना सर्विस के थे. स्क्वाड्रन लीडर बडूनी की मेहनत, व्यवस्थित सोच और कुशल प्रबन्धन की वजह से उन विमानों को उड़ान के काबिल बनाया जा सका.

जे पी बडूनी के योगदान को दिसम्बर 1971 में युद्ध के दौरान के काम से भी जोड़कर देखा जाता है. 1972 के मध्य में ऐसे विमानों की तादाद अच्छी खासी हो गई थी जिनके इंजन में बदलाव किया जाना था क्यूंकि और इंजन व मोडिफिकेशन किट उपलब्ध नहीं थे. और जब विदेश से खरीदे गये इंजन की खेप आई तो वह भी बिना पूरी मोडिफिकेशन किट के थी. स्क्वाड्रन लीडर बडूनी ने किट के कुछ पुर्जों का स्वदेशी तरीके से बन्दोबस्त किया और इस तरह से विमानों के लम्बित बदलाव समय पर हो सके.

उनकी सूझबूझ, लगनशीलता और सेवा के प्रति भावना को देखते हुए 26 जनवरी 1974 को उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल (VSM ) से नवाज़ा गया. 1982 में तरक्की देकर उन्हें स्क्वाड्रन लीडर से विंग कमांडर बनाया गया. वायु सेना में 25 साल की सेवा के बाद 30 जून 1987 को रिटायर हुए विंग कमांडर जे पी बडूनी अब 77 साल के हैं.

(विंग कमांडर जे पी बडूनी की तैनाती व सेवा रिकार्ड सम्बन्धी इनपुट भारत रक्षक डाट काम से लिया गया है)

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