अक्सर लोग धोखा खा जाते हैं सिक्किम की इस महिला की तस्वीरों से

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डॉ दीपसिखा चेत्त्री

इनकी ग्लेमरस तस्वीरों को देखकर ज़्यादातर लोग धोखा खा जाते हैं. खासतौर से तब जब इनके प्रोफेशन के बारे में पता चलता है. क्योंकि जिस प्रोफेशन में ये हैं उसके बारे ,  खासतौर पर भारतीय समाज में , छवि ऐसी बनी हुई है कि लोग सोच  भी नहीं सकते कि इस प्रोफेशन को अपनाकर भी जिंदगी को मन मुताबिक़ खुश रहकर , ख़ुशी बांटकर , देश , लोगों और बेजुबानों की सेवा करके बुलंदी से जीया जा सकता है. जीवन के हर पहलू को जीने वाली ये हैं भारतीय सेना में डॉक्टर कैप्टन दीपसिखा चेत्त्री.

डॉ दीपसिखा चेत्त्री

सिक्किम की रहने वाली डॉ दीपसिखा चेत्त्री अपने राज्य की दूसरी ऐसी महिला हैं जो भारतीय सेना में अधिकारी बनी. साथ ही बनी प्रेरणा उन नौजवानों के लिए जो जीवन को भरपूर जीने की कोशिश करते हैं. बर्फीले  पहाड़ी इलाके में घुटनों तक बर्फ में धंसी टाँगे , हाथों में बंदूक और  गर्दन पर लटका स्टेथोस्कोप – फौजी वर्दी में डॉ दीपशिखा की ये तस्वीर तो कभी कभी विरोधाभास पैदा करने के कारण लोगों को भ्रम में डाल देती है कि ये किसी मॉडल या एक्ट्रेस का फोटोशूट है. ये तो डॉ दीपसिखा के ड्यूटी के दौरान की तस्वीर है लेकिन ड्यूटी पर न रहते हुए यानि छुट्टी के दिनों में अथवा खाली समय में उनकी गतिविधियों की तस्वीरें तो लोगों को और भी हैरान कर देने वाली हैं.

डॉ दीपसिखा चेत्त्री

सिक्किम मनीपाल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (Sikkim Manipal Institute of Medical Science ) से एमबीबीएस में  टॉप करने वाली युवती दीपसिखा ने सेना में जाने का फैसला लिया. दीपसिखा सौभाग्यशाली भी है कि उसे राजेन्द्र चेत्त्री और बिंदु चेत्त्री जैसे माता -पिता मिले जिन्होंने उसे अपने स्टाइल से जिंदगी जीने की आज़ादी दी. सिक्किम के राजेन्द्र चेत्त्री की पहचान फ़ुटबाल खिलाड़ी के साथ साथ बैडमिन्टन में भी है.

डॉ दीपसिखा चेत्त्री का अंदाज

दीपसिखा ने भारतीय सेना की चिकित्सा कोर में  21 अक्टूबर 2020 को कमीशन हासिल किया था. देश के अग्रिम मोर्चे में प्रशिक्षण के लिए गई हैं दीपसिखा की  कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई जो लोकप्रिय हुई और तब उनकी तरफ लोगों का ज्यादा ध्यान भी गया . डॉ दीपसिखा ने वालंटियर के तौर पर और फ्रीलांस के रूप में भारत के दक्षिणी राज्यों के देहाती इलाकों में काम किया. उन्होंने दिल्ली के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में डॉक्टर की हैसियत से इंटर्नशिप की.

डॉ दीपसिखा चेत्त्री

खिलाड़ी पिता की सन्तान डॉक्टर दीपसिखा को जिस्मानी  फिटनेस तो परम्परा में ही मिली और ये उनका शौक भी बना रहा. सेना में जाने का सपना भी दीपसिखा ने बचपन में ही पाल लिया था. यही सोचकर दीपसिखा ने 10 वीं पास करने के बाद गणित के साथ जीव विज्ञान ( biology ) को भी विषय के तौर पर लिया लेकिन दीपसिखा चेत्त्री को झटका तब लगा जब राष्ट्रीय रक्षा अकादमी ( national defence academy – NDA ) की परीक्षा में बैठने की तैयारी की. पता चला कि एनडीए के जरिये तो लड़कियां सेना में जा ही नहीं सकती.

डॉ दीपसिखा चेत्त्री को जानवरों से भी बेहद लगाव है.

दीपसिखा कहती हैं कि विज्ञान की पढ़ाई के साथ उनको दवाओं से प्यार हो गया और उन्होंने इसके बाद डॉक्टर बनने का फैसला लिया. डॉक्टर बनकर सेना में भी आने का उनका सपना सच हुआ. लेकिन ये इतना आसान नहीं था क्यूंकि सेना में वैकेंसी के मुकाबले आवेदकों की तादाद बहुत ज्यादा थी लिहाज़ा इस कम्पीटीशन के लिए भी खासी मेहनत की ज़रूरत थी. काम से खाली होने पर या छुट्टी के समय भी अति सन्वेदनशील डॉ दीपसिखा सेवा करके ख़ुशी हासिल करती हैं. सेना में आने से पहले ऐसी ही खाली समय में वे बीमार और बूढ़े हाथियों की सेवा करने का मौका भी नहीं चूकीं. उनके  फेसबुक खाते की पोस्ट में हाथियों को नहलाने की एक फोटो मार्च 2018 की है.

( कुछ फोटो और सामग्री eastmojo.com से साभार )