सीमा पर शहीद हुए इस मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट की शादी 7 मार्च को होनी थी

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मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट
शहीद मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट (फाइल फोटो).

देहरादून के बिष्ट परिवार के तमाम सपने उन पाकिस्तानी घुसपैठियों की बिछाई बारूदी सुरंग ने चूर चूर कर डाले जिसे निष्क्रिय करने के दौरान हुए धमाके ने मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट के प्राण ले लिए. भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर में तैनात 31 वर्षीय मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट को 28 फरवरी को घर लौटना था जहां उनकी शादी की तैयारियां चल रही थीं. मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट की शादी के लिए 7 मार्च का दिन तय किया गया था.

मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट शनिवार (16 फरवरी) की दोपहर तकरीबन तीन बजे नौशेरा सेक्टर में उन बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय कर रहे थे जो पाकिस्तानी सीमा पर नियंत्रण रेखा के करीब डेढ़ किलोमीटर भीतर लगाई गई थी. सेना के बम निरोधक दस्ते का नेतृत्व भी वही कर रहे थे. एक बारूदी सुरंग को बेकार करने में कामयाब होने के बाद जब मेजर चित्रेश दूसरे बम को निष्क्रिय कर रहे थे तभी वो ऐक्टिव हो गई और धमाका हुआ. मेजर चित्रेश के साथ एक साथी जवान भी घायल हुआ लेकिन मेजर चित्रेश को इतनी गहरी चोटें आईं जो उनकी जान जाने की वजह बनीं.

मेजर चित्रेश बिष्ट को उनके साथी बेहद कर्तव्य परायण और एक जांबाज़ अधिकारी के तौर पर याद करते हैं. मेजर चित्रेश के पिता सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी हैं.

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