शौर्य चक्र से सम्मानित शहीद औरंगजेब के घर का पता है छत पर फहराता तिरंगा

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शहीद औरंगजेब
औरंगज़ेब के पिता मोहम्मद हनीफ और मां राज बेगम.

अशोक चक्र से मरणोपरांत सम्मानित जम्मू कश्मीर पुलिस के शहीद सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) बाबूराम के गांव धारना से निकलने के कुछ देर बाद रास्ते में एक नौजवान से शहीद औरंगजेब के घर का पता पूछने पर जो जवाब मिला वो भी औरंगज़ेब और उसके परिवार की देशभक्ति वाले जज्बे को एक तरह के फौज़ी सलाम से कम नहीं था. नौजवान का जवाब था, “इस सड़क को छोड़ना नहीं सीधे चलते जाना, औरंगजेब का घर दूर से ही दिखाई दे जायेगा” ये बात उस नौजवान ने तब बताई थी जब औरंगजेब का घर तो क्या गांव भी कुछ मील दूर था. इससे पहले कि उससे पूछा जाता कि पहचानेंगे कैसे? वो नौजवान खुद ही बोल पड़ा, ” इस सड़क पर ही है औरंगज़ेब का गांव सलानी, बस जिस घर पर तिरंगा लगा दिखाई दे वही है औरंगज़ेब का घर.”

शहीद औरंगजेब
जम्मू कश्मीर के मेंढर के सालानी गांव में पहाड़ पर औरंगजेब का घर जिस पर तिरंगा एक पहचान बन गया है.

‘ सड़क से सरहद तक’ #SadakSeSarhadTak विशेष कवरेज के दौरान रक्षक न्यूज़ की टीम को रास्ते में मिले इस पहाड़ी गुज्जर नौजवान के पंजाबी डोगरी मिश्रित बोली में दिए इस जवाब और हाव भाव ने और दिलचस्पी पैदा कर दी. अगर औरंगज़ेब के घर का पता बताते वक्त भी किसी और गांव का ये नौजवान फख्र महसूस कर रहा है तो समझा जा सकता है कि औरंगजेब और उसके परिवार को कितना सम्मान मिलता होगा. लगा कि नौजवान शायद कहना चाह रहा है कि आतंकवादियों की कैद में होने के बावजूद उनकी आँखों में आँखे डालकर जवाब दे रहा वो फौज़ी औरंगजेब मेरा ही भाई था..! खैर उस नौजवान की दी जानकारी बिलकुल सही थी. जम्मू कश्मीर के पूंछ जिले के मेंढर सेक्टर (mendhar sector ) के सलानी गांव तक पहुँचने से पहले दूर से ही दिखाई दे गया पहाड़ी सड़क के किनारे वो घर जिस पर तिरंगा लहरा रहा था. वाकई में ये ऐसा ही था जैसा उस लड़के ने बताया.

शहीद औरंगजेब
रिटायर्ड फौजी पिता मोहम्मद हनीफ चौधरी और मां राज बेगम के साथ औरंगज़ेब की उस दिन की फोटो जब वो भारतीय सेना का हिस्सा बना.

भारतीय सेना के रिटायर हवलदार मोहम्मद हनीफ चौधरी (mohammad haneef chaudhary) का बेटा औरंगजेब राष्ट्रीय राइफल्स में राइफलमैन शोपियां में तैनात था जिसे आतंकवादियों ने कश्मीर के पुलवामा में अगवा करके बंधक बना लिया था. उस समय वो परिवार के पास ईद की खुशियां मनाने के लिए गांव जाने के वास्ते छुट्टी लेकर पूंछ की तरफ निकला था. आतंकवादी उससे कुछ जानकारी उगलवाना चाहते थे और इस मकसद से औरंगज़ेब को पेड़ से बांधकर रास्ते में ही सवाल जवाब कर रहे थे. ऐसे हालात में भी वो निडर होकर उनको वही जवाब दे रहा था जो उसे लगा कि देने चाहिए. औरंगजेब पर आतंकवादियों का दबाव असर नहीं कर रहा था. 14 जून 2018 की इस घटना का वीडियो आतंकवादियों ने ही रिकॉर्ड किया था जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. हालांकि वीडियो में, पूछताछ करने वाले, आतंकवादी नहीं दिखाई दे रहा था बस उसकी आवाज़ सुनाई दे रही थी. लेकिन जिस तरह से औरंगजेब जवाब दे रहा था वो बताता है कि मौत को सामने देख भी औरंगजेब बेख़ौफ़ था.

शहीद औरंगजेब
शहीद औरंगजेब

सुरक्षा बलों की आतंकवाद निरोधक कार्रवाइयों में शामिल रहा राइफलमैन औरंगज़ेब 44 राष्ट्रीय राइफल्स में (rashtriya rifles) 2012 में भर्ती हुआ था. औरंगजेब को शौर्य चक्र (मरणोपरांत) से नवाज़ा गया था.

वीडियो रिकॉर्ड करके जारी करने का आतंकवादियों का मकसद शायद जम्मू कश्मीर के रहने वाले फौजी और पुलिस परिवार के सदस्यों को डराना रहा होगा लेकिन असर इसका ठीक उलट हुआ. कम से कम औरंगजेब के परिवार के मामले में तो यही दिखाई पड़ा. खुद औरंगज़ेब के रिटायर्ड फौजी पिता मोहम्मद हनीफ चौधरी और माँ राज बेगम ने औरंगज़ेब की शहादत के फ़ौरन बाद ही अपने दो और बेटों मोहम्मद तारिक और मोहम्मद शबीर को फ़ौजी वर्दी पहनाने का साहस दिखाया. हालांकि औरंगज़ेब से पहले उनका बड़ा बेटा मोहम्मद कासिम भी सेना में है. यही नहीं उनके दो और छोटे बेटों में से आसिम भी अपने पिता और भाइयों के नक्शे कदम पर चलते हुए फ़ौज में भर्ती होने की तैयारी में है.

शहीद औरंगजेब
औरंगजेब की शहादत के बाद सेना में भर्ती हुए उसके दो छोटे भाइयों से तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने मुलाक़ात की थी .

गज़ब के हौसले वाला परिवार :

खुद सिपाही बने और तीन बेटे भी सिपाही के तौर पर भर्ती हुए लेकिन अब हनीफ चाहते हैं कि सबसे छोटा वाला बेटा आसिम तो अफसर बन जाए. आसिम अभी आर्मी स्कूल में दसवीं की पढ़ाई कर रहा है. एक तो पहले से ही फौजी खून और अब औरंगज़ेब की शहादत का भी हिसाब लेने के जुनून ने मोहम्मद हनीफ के परिवार को एक ही मकसद दे दिया है – आतंकियों और आतंकवाद का खात्मा. पहले पति और अब बेटों को फौजी वर्दी में देखना शायद राज बेगम के जीवन का ऐसा हिस्सा बन गया है जिसे उन्होंने ख़ुशी से स्वीकारा है. सरल स्वभाव की और कम बोलने वाली राज बेगम का हौसला भी गज़ब का है जब ऐसे माहौल में भी घर आये अजनबी मेहमानों को शिद्दत के साथ तंदूर में बनाई ताज़ा मक्का की रोटी, साग और खूब सारे देसी घी में डालकर शक्कर परोसते हुए कहती हैं “आने का पहले बताते देते तो खाने की अच्छी तैयारी करते, दोबारा ज़रूर आना और आने से पहले खबर दे देना.”

शहीद औरंगजेब
अलग अलग वेश बनाकर रखता था जवान औरंगज़ेब

देश भक्ति, दृढ़ता और हौसला – हिम्मत कितना भी हो लेकिन माँ तो आखिर माँ ही होती है. फर्ज़ के लिए शहीद हुए बेटे औरंगजेब की साफ़ सुथरी तस्वीर को एक बार फिर से ऐसे साफ़ करते हुए जब लाती थीं जैसे, हमेशा के लिए दुनिया से अलविदा हुए, बेटे को दुलार रही हो.

शहीद औरंगजेब
सालानी में अपने घर में हनीफ़ चौधरी 6 में से चार बेटों, पत्नी राज बेगम, चचेरे भाई और पोते के साथ.

दिल्ली से जा बसे पूंछ :

सेना में भर्ती होने वाले अपने खानदान के पहले बेटे रहे मोहम्मद हनीफ चौधरी और उनके बाद सबसे छोटे भाई आफताब हुसैन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ – BSF) में भर्ती हुए. आफताब हुसैन बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर थे. उनके दो भाई सऊदी अरब में काम करते हैं. दादा साहिबदीन चौहान मनकोट के नम्बरदार थे. दिलचस्प बात ये है कि उनके पूर्वज़ एक ज़माने में दिल्ली में बसे हुए थे. मोहम्मद हनीफ बताते है कि पूर्वज जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह के पास काम करते थे. महाराजा ने उनको यहां बसाते हुए नम्बरदारी भी दी. पहले उनके पास बहुत बड़े इलाके की नम्बरदारी थी जो बदलते वक्त के साथ कम होती चली गई. मोहम्मद हनीफ सेना की सेवा को बेहतरीन मानते हुए कहते हैं. “फ़ौज की नौकरी में हक हलाल की कमाई है.” कहते हैं – मेरे सेना में भर्ती होने का असर ये हुआ कि घर में अनुशासन आ गया.

शहीद औरंगजेब
जब खुद सेना का हिस्सा थे हवलदार मोहम्मद हनीफ चौधरी.

सियासत में दाखिला :

मोहम्मद हनीफ रिटायर ज़रूर हुए हैं लेकिन शारीरिक रूप से काफी सक्षम हैं. ‘जय जवान और जय किसान’ वाला जीवन देखने के बाद अब सियासत में खुद को आज़माना चाहते हैं. आतंकवाद और सेना ही नहीं, सामाजिक और सियासी विभिन्न मुद्दों पर हनीफ चौधरी मुखर होते हैं. उनको केंद्र सरकार में वर्तमान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी भा गई जिसकी उन्होंने औपचारिक सदस्यता भी ली. मोहम्मद हनीफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फरवरी 2019 में जम्मू के पास साम्बा में रैली के दौरान मंच भी साझा किया. यहीं पर मोहम्मद हनीफ के बीजेपी में शामिल होने का ऐलान भी किया गया. लेकिन मोहम्मद हनीफ को वर्तमान सियासी माहौल में ढलने में वक्त लगेगा वरना वो ये न कहते, ” यहां हर कोई दूसरे की टांग खींच कर उसे पीछे करता रहता है ताकि खुद आगे बढ़ सके.”

शहीद औरंगजेब
रक्षक न्यूज़ डॉट इन ( rakshaknews.in ) की टीम के साथ औरंगज़ेब के पिता मोहम्मद हनीफ और मां राज बेगम