पुलिस ने भारतीय सेना के उस पूर्व कैप्टन को रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग की मदद से पकड़ लिया जो बरसों से गायब था . संदीप तोमर नाम के इस पूर्व कैप्टन को अपनी पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने उम्र कैद की सज़ा सुनाई थी. यह अपनी असली पहचान छुपाकर सैंकड़ों मील दूर न सिर्फ आराम से रह रहा था बल्कि एक फैक्ट्री में मैनेजर के पद पर नौकरी भी कर रहा था. बताया तो यह भिजा रहा है कि इसने फिर से शादी भी कर ली है .
एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार (31 मार्च) को बताया कि संदीप तोमर को मध्य प्रदेश के पांढुर्ना ज़िले से गिरफ्तार किया गया और पंजाब के फाज़िल्का की एक अदालत में पेश किया गया. अदालत ने शनिवार (28 मार्च, 2026) को उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
संदीप तोमर 12 बिहार रेजिमेंट में था और पंजाब में अबोहर छावनी में तैनात था जहां उसकी पत्नी श्वेता सिंह की 2013 में मौत हुई थी . अदालत ने कैप्टन संदीप तोमर को 2014 में इस केस में सजा सुनाई . उस पर श्वेता की गला घोंटकर हत्या करने और उसे सुसाइड दिखाने की कोशिश करने का अपराध सिद्ध हो गया था . अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी जिसके खिलाफ संदीप तोमर ने हाई कोर्ट में अपील की . पांच साल बाद यानि 2019 में अदालत ने फिरोजपुर जेल में बंद संदीप तोमर को ज़मानत दे दी . हालांकि कैप्टन तोमर को सेना से बर्खास्त कर दिया गया था. पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जब 2022 में उसकी सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया तो आत्मसमर्पण करने की बजाय यह पूर्व कैप्टन गायब हो गया.
इस बीच संदीप तोमर के ससुर, राम नरेश ने 2024 में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी और उसकी गिरफ्तारी की मांग की. इस पर सुनवाई के बाद में हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि पंजाब के पुलिस महानिदेशक (director general of police ) 8 अप्रैल तक एक हलफनामा दायर करे और उसमें बताया जाए कि मुजरिम संदीप तोमर को तलाशने में क्या कदम उठाए गए हैं.
अदालती सख्त फरमान के बाद पुलिस ने संदीप तोमर की खोज के लिए एक विशेष जांच दल ( special investigation team ) का गठन किया, जिसका नेतृत्व पुलिस अधीक्षक ( एसपी ) रैंक के एक अधिकारी को सौंपा गया . पंजाब पुलिस की एसआईटी ने नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड के साथ मिलकर जांच की और संदीप तोमर का असली पैन कार्ड ढूंढ़ निकाला. कामयाबी तब मिली जब फाज़िल्का पुलिस ने संदीप तोमर के पेन कार्ड ( pan card ) से जुड़े एक बैंक खाते का पता लगाया, जिसका इस्तेमाल उसने एलपीजी सिलेंडर ( lpg cylinder) बुक करने के लिए किया था. वह पांढुर्ना की एक एजेंसी से एलपीजी सिलेंडर रिफिल करवा रहा था.
इस सुराग पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने उसकी लोकेशन मध्य प्रदेश में ट्रैक की, जहां से आखिरकार उसे हिरासत में ले लिया गया.
छानबीन के दौरान पता चला कि फरार होने के बाद वह अपनी असली पहचान छिपाकर रहने के ठिकाने बदलता रहा. पहले चण्डीगढ़ के पास जीरकपुर में प्रॉपर्टी एजेंट के तौर काम करते हुए दिन बिताये . फिर वह ओडिशा , बेंगलुरु और आखिर में मध्य प्रदेश जा पहुंचा . यहां उसने पांढुर्ना में किराए का मकान लिया था.













