भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 262वें सेना चिकित्सा कोर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य के हिस्से के तौर पर मंगलवार को दिल्ली छावनी स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में नेत्र विज्ञान, कैंसर रोग चिकित्सा-ऑन्कोलॉजी और जॉइंट रिप्लेसमेंट केंद्रों की आधारशिला रखी और बेस हॉस्पिटल में नए बुनियादी ढांचे का शिलान्यास किया. आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में अत्याधुनिक सुविधाओं से सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की तृतीयक देखभाल क्षमताओं (वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा उन्नत तकनीक का उपयोग कर विशेषज्ञ सेवा) उच्च विशिष्ट, जटिल चिकित्सा सेवाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, खास तौर से नेत्र देखभाल, कैंसर उपचार और जटिल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्रों में इससे बेहतर उपचार होगा .
दिल्ली स्थित सेना के बेस अस्पताल में नए अस्पताल के आधारभूत ढांचे को 998 बिस्तरों की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है, जिसमें रक्षाकर्मियों की नियमित और आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताएं पूरी करने के लिए आपात स्थिति में अतिरिक्त 100 बिस्तरों का विस्तार भी शामिल है.
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर नवाचार, क्षमता वर्धन और आधुनिक प्रौद्योगिकियों के एकीकरण की अहमियत पर जोर दिया . उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक प्रौद्योगिकी और बुनियादी अवसंरचना से युक्त नई सुविधाओं से सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को अच्छा उपचार मिलेगा .
राजनाथ सिंह ने देश और नेपाल समेत पड़ोसी देशों में चिकित्सा शिविर संचालित करने के लिए उनकी सराहना की और विशेष रूप से उनके ग्लूकोमा सर्जरी और नेत्र देखभाल सेवाओं के सफल संचालन का उल्लेख किया . राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं से कहा कि वे देश के चारों कोने में आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रैफरल) जैसे संस्थान स्थापित करने की संभावना का पता लगाएं, ताकि प्रत्येक क्षेत्र और स्थान पर तैनात सैनिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा सकें. उन्होंने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि कोई नई परियोजना आरंभ की जाए या सर्वथा नया संस्थान स्थापित किया जाए. इसमें पहले से चल रही परियोजनाओं (ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स) में भी अपार संभावनाएं हैं. विभिन्न स्थानों पर स्थित कमांड अस्पतालों या बेस अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करके इसी स्तर तक उन्नत किया जा सकता है.
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सैन्य नर्सिंग सेवा 9 military nursing service ) की तारीफ़ करते हुए उन्हें चिकित्सा बलों का आधार बताया. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें ‘पूर्व सैनिक’ का दर्जा देने का हाल का निर्णय रक्षा बलों के कर्मियों के साथ ही चिकित्सा पेशेवरों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता रेखांकित करती है.
राजनाथ सिंह ने अपने दौरे में एक लाइव प्रदर्शन का भी अवलोकन किया और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी क्षेत्र का दौरा किया, जहां युद्धकालीन चिकित्सा देखभाल में अत्याधुनिक नवाचारों और प्रगति प्रदर्शित की गई है. उन्होंने
सशस्त्र सैन्य चिकित्सा सेवा के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल की रक्षा मंत्री ट्रॉफी कमान अस्पताल (दक्षिणी कमान) पुणे को प्रदान की, जबकि द्वितीय सर्वश्रेष्ठ अस्पताल का पुरस्कार इंडियन नेवल हॉस्पिटल शिप, अश्विनी, मुंबई को दिया गया. ये पुरस्कार रक्षा बलों के अस्पताल नेटवर्क में इन दोनों अस्पतालों के उत्कृष्ट प्रदर्शन, रोगी देखभाल में उत्कृष्टता, नवाचार और प्रशासनिक दक्षता के लिए दिए गए। रक्षा मंत्री ने इन सम्मानों को उनके सामूहिक समर्पण और अथक कार्यों का प्रमाण बताया।
रक्षा मंत्री ने ‘प्रेसिशन प्रोटोकॉल’ इन अर्ली न्यूरो डेवलपमेंल इंटरवेंशन’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया , जो न्यूरोडेवलपमेंट (मस्तिष्क विकार) स्थितियों के प्रारंभिक निदान और पहल को मानकीकृत और बेहतर बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान है। यह प्रकाशन अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धतियों पर सैन्य बल चिकित्सा सेवा के बढ़ते ध्यान को रेखांकित करता है. इस कार्यक्रम में प्रमुख सेना अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के.त्रिपाठी, सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, एएफएमएस महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, वायु सेना उपाध्यक्ष एयर मार्शल नागेश कपूर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे













