72 घंटे में वायुसेना का दूसरा जगुआर दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सुरक्षित

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Indian Airforce
भारतीय वायुसेना का तीन दिन पूर्व दुर्घटनाग्रस्त जगुआर विमान. (फाइल फोटो)

अहमदाबाद. अभी 6 जून को महज दो दिन बीते जब भारतीय वायुसेना (Indian Airforce-आईएएफ) का एक और जगुआर आज शुक्रवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि आज की दुर्घटना में विमान तो नहीं बचा पर पायलट बाल-बाल बच गया. 6 जून की दुर्घटना में हमारे जांबाज एयर कमोडोर संजय चौहान की मौत हो गई थी.

आज की उड़ान के दौरान जगुआर विमान में तकनीकी गड़बड़ी पैदा हुई और वह गुजरात में एक वायुसेना अड्डे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया. आईएएफ के एक प्रवक्ता ने कहा कि पॉयलट एक स्क्वाड्रन लीडर हैं और वह नियमित प्रशिक्षण मिशन के बाद जामनगर वायुसेना अड्डे पर लौट रहे थे. विमान को उतारने के दौरान पॉयलट को विमान में एक गड़बड़ी का पता चला.

वह सुरक्षित रूप से विमान से बाहर आने में कामयाब रहे, लेकिन यह तत्काल पता नहीं चल सका है कि उन्हें कोई गंभीर चोट आई है या नहीं. सूत्रों ने कहा कि रॉकेट समर्थित इजेक्शन सीट ने पॉयलट को बाहर किया, लेकिन इससे पहले विमान 500 फुट तक लुढ़का. इसके बाद विमान फिर 100 फुट तक लुढ़का और फिसलकर बगल की डामरयुक्त खुरदुरी जगह पर पहुंच गया. प्रवक्ता ने कहा कि दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. बीते तीन दिनों में दूसरी बार आईएएफ जगुआर दुर्घटनाग्रस्त हुआ है.

उत्तर पश्चिम गुजरात के कच्छ क्षेत्र में मंगलवार को एक जगुआर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसके पॉयलट एयर कोमोडोर संजय चौहान की मौत हो गई थी. उन्होंने भी जामनगर वायुसेना अड्डे से नियमित प्रशिक्षण मिशन के लिए उड़ान भरी थी. वायु सेना मेडल से सम्मानित और विभिन्न विमानों की उड़ान में माहिर 50 वर्षीय एयर कोमोडोर संजय चौहान इसी जगुआर के पायलट थे.

जगुआर विमान चार दशक से सेवा में है. यह एसईपीईसीएटी के लाइसेंस के तहत निर्मित हैं. एसईपीईसीएटी एक एंग्लो फ्रेंच संघ है. आईएएफ इन्हें आधुनिक एवियॉनिक्स, रडार प्रणाली और आधुनिक इंजनों के साथ उन्नत कर रहा है, जिससे इसका सेवा काल बढ़ाया जा सके.

जगुआर के बारे में

भारतीय वायुसेना (Indian AirForce) में जगुआर विशिष्ट कैटेगरी का जंगी विमान है. यह विमान दुश्मन की सीमा में भीतर तक घुसकर हमला करने में यह सिद्धहस्त माना जाता है. वायुसेना इस जहाज के जरिये दुश्मन के एयरबेस, कैम्पों और जंगी जहाजों पर हमला बोल सकती है और चंद पलों के भीतर सब कुछ तबाह करने की क्षमता रखती है.

दुश्मन के इलाके में बेहद भीतर तक घुसकर मार करने की क्षमता रखने वाले 121 जगुआर भारतीय वायु सेना के बेड़े में है लेकिन पुराने पड़ चुके इन विमानों की जगह दूसरे विमान लाये जाने का प्रस्ताव लम्बे समय से अटका हुआ है.

भारतीय वायु सेना का लड़ाकू विमान जगुआर क्रेश, पायलट एयर कोमोडोर संजय चौहान की मौत