अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने अफगानिस्तान से सेना वापसी को सही ठहराया

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अमेरिका
अफगानिस्तान से सेना वापसी की फाइल फोटो.

अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े और हिंसा के बदले हालात के बीच अपनी सेना वापस बुलाने के फैसले को सही ठहराया है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन अफगानिस्तान के ताज़ा हालात के दौरान पहली बार खुलकर अपनी नीति स्पष्ट की है. राष्ट्रपति बाइडन ने साफ़ साफ़ कहा है कि अमेरिका का इरादा अब अफगानिस्तान में अपनी सेनाओं को और रखने का नहीं है. इस बीच भारत ने , अफगानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े के बाद बिगड़े हालात के मद्देनज़र भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकालने की कोशिशें लगातार तेज़ कर दीं हैं. अफगानिस्तान के पहले उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है. दूसरी ओर एक प्रेसवार्ता में तालिबान ने अपने आगामी शासन का खाका पेश किया.

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता सुहैल शाहीन का कहना है कि भारत को अफगानिस्तान में चालू अपनी परियोजनाओं को पूरा करना चाहिए. वहीँ तालिबान प्रवक्ता ने ये भी कहा कि वे अफगानिस्तान की जमीन को किसी भी मुल्क के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देंगे. अफगानिस्तान के हालात को लेकर उसके प्रति अपनी नीति को भारत ने अभी स्पष्ट नहीं किया है. मंगलवार देर शाम तक सरकार में शीर्ष स्तर पर इस बारे में मंत्रणाओं का दौर जारी था. भारत सरकार ने अफगानिस्तान में अरबों रुपये लागत वाली परियोजनाओं को हाल के कुछ वर्षों में शुरू किया था. वही अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में भारत के नागरिक और भारतीय मूल के लोग हैं जो अब वहां पर फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अमेरिकी सेना का अफगानिस्तान से जाने का फैसला एकदम सही है क्योंकि अफगान सेनाओं ने तो लडे बिना ही हथियार डाल दिए थे. उनका कहना है कि मैं ऐसा चौथा राष्ट्रपति हूँ जिसने अफगानिस्तान में जंग के हालात देखे. बाइडन ने एक ट्वीट संदेश में ये बात कही. उनका कहना था कि दो रिपब्लिकन और दो डेमोक्रेट राष्ट्रपति इस जंग को देख चुके हैं अब मैं इस जंग को पांचवें राष्ट्रपति को नहीं पहुंचाउंगा.

दूसरी तरफ़ा तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने इस बात का ऐलान करते हुए तमाम देशों को आश्वस्त किया है कि दूतावासों मिशनों और तमाम अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी. हम लोग इसके लिए प्रतिबद्ध हैं. उनका ये भी कहना था कि अफगानिस्तान में महिलाओं को उनके हकों से महरूम नहीं किया जाएगा लेकिन उन्हें स्वास्थ्य चिकित्सा आदि उन्हीं क्षेत्रों में काम करना होगा जहां उनकी ज़रुरत है.