विवाद के बाद राकेश अस्थाना और 3 अधिकारी सीबीआई से हटाये गये

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राकेश अस्थाना
राकेश अस्थाना को दिल्ली का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है.

भारत की सबसे अहम जांच एजेंसी केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई-CBI) में मुखिया बनने की कतार में समझे जाने वाले भारतीय पुलिस सेवा के 1984 बैच के गुजरात कैडर के अधिकारी राकेश अस्थाना को सीबीआई में कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटाकर विमानन सुरक्षा का मुखिया बना दिया गया है. राकेश अस्थाना सीबीआई में अपने बॉस (निदेशक) आलोक वर्मा के बाद नम्बर दो की हैसियत रखते थे.

सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा से झगड़े के बाद शुरू हुए विवाद के बाद सीबीआई में तीन और अधिकारियों को भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही रुखसत किया गया है. आलोक वर्मा को तो देश के इस सबसे अहम पुलिस संगठन में कार्यकाल पूरा होने के सिर्फ 21 दिन पहले ही यानि 10 जनवरी को हटाकर दूसरे ओहदे पर भेजा गया जिसे कबूल करने के बजाय आलोक वर्मा ने सरकार को अपने कार्यमुक्ति का पत्र भेज दिया था.

राकेश अस्थाना को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस -BCAS) का महानिदेशक बनाया गया है. ये जगह भारतीय पुलिस सेवा के 1985 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी कुमार राजेश चन्द्रा को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी – SSB) का महानिदेशक बनाये जाने के बाद खाली हुई थी. अस्थाना दो साल इस पद पर रहेंगे.

आईपीएस अधिकारी आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के साथ साथ सीबीआई से जो तीन अधिकारी वक्त पूरा होने से पहले हटाये गये हैं वो हैं : संयुक्त निदेशक (ज्वाइंट डायरेक्टर – JD ) अरुण कुमार शर्मा, उप महानिरीक्षक (डीआईजी – DIG) मनीष कुमार सिन्हा और पुलिस अधीक्षक (एसपी – SP) जयंत जे नाइकनवरे. ये तीनों, आलोक वर्मा और अस्थाना के बीच हुए झगड़े में आलोक वर्मा के नजदीकी अधिकारियों के तौर पर देखे जा रहे थे.

आईपीएस अधिकारी अरुण कुमार शर्मा को केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ – CRPF) में अतिरिक्त निदेशक बनाया गया है. आलोक वर्मा के सीबीआई में कार्यभार सम्भालने के अगले महीने ही अरुण कुमार शर्मा को संयुक्त निदेशक (पालिसी) बनाया गया था और इसी साल अक्टूबर में राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज किये गये भ्रष्टाचार के मामले की जाँच भी शर्मा की निगरानी में चल रही थी.

अस्थाना ने केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी CVC) को भेजी शिकायत में आरोप लगाये थे कि अरुण शर्मा और उनके परिवार के सदस्य कुछ ऐसी फर्ज़ी कम्पनियों में साझीदार हैं जो सन्देहजनक लोग चला रहे हैं.

वहीं उप महानिरीक्षक (डीआईजी – DIG) मनीष कुमार सिन्हा अपने ही वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज इस केस की जांच कर रहे थे.