चंडीगढ़ में एसएसपी के तबादला विवाद के कई पहलू सामने आए

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चंडीगढ़
आईपीएस कुलदीप सिंह चहल और आईपीएस मनीषा चौधरी

पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी और साथ ही केन्द्रशासित क्षेत्र चंडीगढ़ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के ओहदे से आईपीएस कुलदीप सिंह चहल की वक्त से पहले रुखसती विवाद का कारण बन गई है. उनके स्थान पर आईपीएस मनीषा चौधरी को एसएसपी का कार्यभार सौंपे जाने को इस विवाद से जोड़कर नया रूप भी दिया जा रहा है. ये कोई पहला मामला भी नहीं है जब चंडीगढ़ में सियासतदानों और अफसरशाहों ने ऐसा विवाद खडा किया हो. इस पूरे मामले में पंजाब के राज्यपाल होने के साथ ही चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच हुए पत्र व्यवहार और उसके सार्वजनिक होने से पूरे सिस्टम की छीछालेदर और हो रही है. दिलचस्प है कि विवाद में ‘आग में घी’ डालने का काम हर किसी पक्ष ने किया लेकिन सब दोषारोपण एक दूसरे पर कर रहे हैं. इसके लिए मीडिया को अपने अपने पक्ष में एक हथियार की तरह से इस्तेमाल भी किया जा रहा है.

कौन हैं विवाद में आए ये एसएसपी :

कुलदीप सिंह चहल भारतीय पुलिस सेवा के पंजाब कैडर के 2009 बैच के अधिकारी हैं. रहने वाले हरियाणा के जींद ज़िले से हैं और पढ़ाई लिखाई हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और साथ ही पंजाब यूनिवर्सिटी से भी की है. दिलचस्प है कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास करके आईपीएस के तौर पर चयनित कुलदीप सिंह चहल चंडीगढ़ पुलिस में सहायक सब इंस्पेक्टर भी रहे हैं. कुलदीप चहल 2005 में चंड़ीगढ़ पुलिस में एएसआई बने थे. इसी पद पर काम करते हुए उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी भी की. 2018 में वीरता पदक से सम्मानित आईपीएस कुलदीप चहल को 2020 चंडीगढ़ का जब एसएसपी बनाया गया तब तक उनकी छवि दबंग पुलिस अधिकारी की बन चुकी थी. वो एक एनजीओ ‘ प्रयास सेवा समिति’ से जुड़े हैं और एक जागरूक समाजसेवी की छवि के भी स्वामी हैं. पर्यावरण, खेल प्रेमी और फिटनेस के शौक़ीन कुलदीप चहल की सोशल मीडिया पर भी अच्छी फैन फ़ॉलोइंग है. फेसबुक पर ही उनको 3 लाख फैन फ़ॉलो करते हैं.

चंडीगढ़
आईपीएस कुलदीप सिंह चहल

आईपीएस कुलदीप चहल को 2021 में प्रतिनियुक्ति पर चण्डीगढ़ का एसएसपी बनाया गया था और इस ओहदे पर तैनाती को पंजाब की अफसरशाही व सत्ता के गलियारों में प्रतिष्ठा की नज़र से देखा जाता है. लिहाजा किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए इस पोस्टिंग को पाना भी एक उपलब्धि से कम नहीं है. आमतौर पर तीन साल के लिए तैनाती होती है लेकिन कुलदीप चहल को इस कार्यकाल के पूरा होने से कई महीने पहले ही हटाकर वापस पंजाब कैडर में लौटने के आदेश कर दिए गए. किसी अधिकारी की अचानक और बिना किसी परम्परागत ‘ विदाई कार्यक्रम’ के रुखसती का लोगों की नज़रों में आना और खलना लाज़मी है. खासकर ऐसा अधिकारी जिसको पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी की तरफ से कई प्रशंसा पत्र भी मिल चुके हों. ऐसा क्यों हुआ जब इसकी कड़ियां जोड़े जाने के समाचार आने लगे तो इससे विवाद और बढ़ता चला गया.

तबादले के पीछे कारण :

दरअसल कुलदीप चहल के तबादले की कहानी और विवाद की शुरुआत पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित को मिली एक सूचना और उसके बाद जारी स्थानांतरण आदेश से होती है. कहा जा रहा है कि इसके पीछे वजह उनके गलत आचरण को बताया गया है लेकिन ये किससे जुड़ा है, इसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ. इसी में चहल पर पक्षपात का इलज़ाम भी लगा है. लेकिन इसके जड़ में क्या है, इसकी सटीक जानकारी अभी दबी हुई है. चर्चा ये भी है कि सप्लाई में घोटाला और भर्ती में किसी तरह की गड़बड़ी को लेकर कुलदीप चहल मुखर हुए थे. कुछ लोग तो ये भी कह रहे हैं कि मातहतों के तबादलों व नियुक्तियों को लेकर विवाद हुआ.

बहरहाल, राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने पंजाब के आला अफसरों से कहा था कि कुलदीप सिंह चहल की जगह दूसरे अधिकारी की तैनाती के लिए प्रक्रिया शुरू की जाए और किन्ही तीन अफसरों के नाम की सिफारिश की जाए लेकिन इस बारे में कुछ भी लिखित नहीं हुआ. अफसरों ने भी उसी तरह जुबानी कुछेक अधिकारियों के नाम सुझा दिए. ये भी लिखित नहीं हुआ. इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान व उनका अमला गुजरात के चुनाव में व्यस्त हो गया. इसी बीच कुलदीप सिंह चहल को चंडीगढ़ के एसएसपी पद से हटा दिया.

क्योंकि कुलदीप चहल के स्थान पर नए एसएसपी की तैनाती के लिए किसी अधिकारी का नाम तय नहीं हुआ था इसलिए उनका कार्यभार अतिरिक्त काम के तौर पर आईपीएस मनीषा चौधरी को सौंप दिया गया. मनीषा चौधरी हरियाणा कैडर की आईपीएस है और चंडीगढ़ पुलिस में प्रतिनियुक्ति पर हैं. वे यहां ट्रैफिक और सुरक्षा की प्रभारी हैं. हालांकि उनको सौंपा गया चंडीगढ़ के एसएसपी का पद एक अस्थाई कार्यभार है लेकिन ये भी विवाद का कारण बनाया जा रहा है. सवाल किया जा रहा है कि पंजाब के हिस्से वाले अहम पुलिस पद पर हरियाणा के अधिकारी कब्जा करने की कोशिश में हैं.

इनमें से कौन बनेगा एसएसपी :

इस बीच पंजाब ने चंडीगढ़ पुलिस में नियमित एसएसपी के पद पर तैनाती के लिए तीन अधिकारियों के नाम की सिफारिश वाला पैनल भेजा है. ये तीन अधिकारी अखिल चौधरी, संदीप कुमार गर्ग और भागीरथ सिंह मीणा हैं. मीणा 2013 बैच के आईपीएस हैं जबकि अन्य दोनों 2012 बैच के हैं. अखिल चौधरी पंजाब पुलिस में सहायक उप महानिरीक्षक (एआईजी) कार्मिक, कानून व्यवस्था और जन शिकायत हैं जबकि संदीप गर्ग चंडीगढ़ से सटे पंजाब के मोहाली में एसएसपी हैं. भागीरथ मीणा पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर ज़िले के एसएसपी हैं.

चंड़ीगढ़ में इसलिए होते हैं विवाद :

दो राज्यों, पंजाब व हरियाणा की साझा राजधानी चंडीगढ़ पर अधिकार की लड़ाई सियासत के स्तर पर बहुत पुरानी है. भाषा और क्षेत्र के हिसाब से पंजाब चंडीगढ़ पर अपना हक़ हमेशा से जताता रहा है. हालांकि केंद्रशासित क्षेत्र होने के कारण उसे हमेशा ये आशंका रही है कि कही उसका चंडीगढ़ पर दावा कमज़ोर न पड़ जाए. इसी कारण पंजाब ने चंड़ीगढ़ से सटे इलाके मोहाली को राजधानी की तरह विकसित करने की कोशिश की. पंजाब ने अपने कई दफ्तर और सार्वजनिक उपक्रमों के मुख्यालय, कर्मचारियों के निवास आदि भी वहां बनाए. वहीं हरियाणा ने भी चंड़ीगढ़ पर अपने कमज़ोर दावे का अहसास करते हुए पंचकुला को अपनी राजधानी की तरह विकसित किया. हरियाणा ने भी पंजाब की तरह अपने दफ्तरो को वहां शिफ्ट किया, गेस्ट हाउस और सरकारी कर्मचारियों के आवास बनाए. हरियाणा के मुख्यमंत्री का सरकारी आवास भी वहां है.

पंजाब और हरियाणा राज्यों के राजभवन वैसे चंडीगढ़ में ही हैं. इस सबके बावजूद चंडीगढ़ पर अपने अधिकार और वहां के प्रशासन में अपने वर्चस्व के लिए यहां की ब्यूरोक्रेसी भी सियासतदानों की तरह लडती रहती है इसके लिए वे एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश भी करते रहते हैं. जब कभी पंजाब, हरियाणा और केंद्र की सरकारों में काबिज राजनीतिक दलों में खींचतान, विचारों की लड़ाई होती है या उनके नेताओं के हित टकराते हैं तब ऐसे विवाद बढ़ते जाते हैं. ऐसे में आर्थिक भ्रष्टाचार भी विवादों की जड़ में आ जाता है. यहां अहंकार और क्षेत्रवाद इतना हावी हो जाता है कि गलत को गलत और सही को सही कहने का साहस कोई नहीं जुटा पाता. इस लड़ाई में एक दूसरे पर दोषारोपण करने और बदनाम करने के लिए विभिन्न पक्ष मीडिया का सहारा भी लेते हैं.

वैसे चंडीगढ़ प्रशासन पर अधिकार के लिए नियम स्पष्ट हैं. यहां 60 प्रतिशत पदों पर पंजाब और 40 फ़ीसदी पर हरियाणा कैडर के कर्मचारी व अधिकारी होते हैं. सिविल प्रशासन से लेकर पुलिस में भी ऐसे ओहदे बरसों से चिन्हित हैं. बावजूद उसके इन स्थानों पर नियुक्तियां, तबादले विवादों में आ ही जाते है. कुछ मामले अदालतों में भी पहुँचते हैं.