सीआरपीएफ अपनी स्थापना का आज 85 वां वर्ष इस तरह मना रहा है

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राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर सीआरपीएफ ने स्थापना दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि आर्पित की
भारत का सबसे बड़ा अर्द्ध सैन्य बल केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ( सीआरपीएफ ) आज अपना  85 वां  स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. दिल्ली में  मुख्य कार्यक्रम में  इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख तपन कुमार डेका ने उन जवानों को मेडल प्रदान कर सम्मानित किया जिन्होंने अपनी ड्यूटी को  शानदार तरीके से पूरा करते हुए उपलब्धियां हासिल कीं . जिन जवानों और अधिकारियों ने अपने कर्तव्य पूरा करने में प्राणों की आहुति दी उनकी पत्नी या  परिवार के सदस्य ने मेडल प्राप्त किए.

इस अवसर पर अपने संबोधन में सीआरपीएफ के  महानिदेशक सुजॉय लाल थाउसेन ने बल की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए बताया कि सीआरपीएफ भारत में सबसे ज्यादा वीरता पदक हासिल करने वाला केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल है. सीआरपीएफ को अब तक 84 साल की सेवा में 2469  वीरता पदक मिले हैं . सीआरपीएफ ने 2022 – 23 के दौरान 10 शौर्य और 187 पुलिस वीरता पदक (police medal for gallantry ) प्राप्त किये है .

वीरता के लिए सीआरपीएफ जवानों को अलंकृत किया गया

सीआरपीएफ (crpf) के महानिदेशक सुजॉय लाल थाउसेन  (sujoy lal thausen ) ने नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर श्रद्धांजलि देते हुए बल के उन जवानों को याद किया जिन्होंने कर्तव्य की बलि वेदी पर अपने प्राण न्योछावर किये. सीआरपीएफ की तरफ से इस मौके पर खास परेड का आयोजन किया गया. सीआरपीएफ महानिदेशक श्री थाउसेन ने शिला पर पुष्पचक्र अर्पित किया .

भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान सीआरपीएफ की पहली बटालियन 27 जुलाई 1939 को मध्य प्रदेश के नीमच में गठित की गई थी. तब सीआरपीएफ की पहचान क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस (crown representative’s police) यानि सीआरपी  (CRP) के तौर पर  थी. 28 दिसंबर 1949 को संसद में प्रस्ताव पास करके इसका वर्तमान नाम केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस  बल ( central reserve police force ) यानि सीआरपीएफ रख दिया गया.

इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख तपन कुमार डेका वीरता पुरस्कार पाने वाले जवानों व अधिकारियों के साथ

वैसे सीआरपीएफ का स्थापना दिवस मानने की तारीख भी बदलती रही है. बीते साल मार्च में और वह भी जम्मू में मनाया गया. पिछले कुछ अरसे से भारत में अलग अलग बलों के ऐसे कार्यक्रम बदल बदल कर अन्य प्रान्तों या स्थान ओं पर किए जाने का सिलसिला शुरू किया गया है.