सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो पहले पहल किसी हिंदी फ़िल्म की शूटिंग का सा लगता है लेकिन इसके साथ जो विवरण लिखा गया उसे पढ़कर कई लोगों की गलतफहमी तो दूर हो जाती है लेकिन उत्सुकता कायम रहती है . पुलिस , सेना और हथियार चलाने के पेशे से ताल्लुक रखने वाले अनुभवी लोगों के बीच इस वीडियो को लेकर सुरक्षा, अनुशासन और हथियारों के इस्तेमाल के नियमों पर बहस छिड़ गई है. उनकी कई तरह की टिप्पणियां पढ़ने को मिल रही हैं .
इसके बाद गुरुवार को छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने आईपीएस अधिकारी अंकिता शर्मा को ‘कारण बताओ नोटिस’ (show cause notice ) जारी कर दिया . वैसे सवाल यह भी उठ रहे हैं कि शस्त्र पूजा एक धार्मिक परम्परागत तरीका है लेकिन पूजा में हथियार चलाना क्यों ज़रूरी है ?
वीडियो दो दिन पहले यानि 20 अक्टूबर का दशहरा के मौके का है . असाल्ट राइफल से गोलियां दागने वाली कोई फ़िल्मी या टीवी कलाकार नहीं बल्कि भारतीय पुलिस सेवा ( indian police service) की एक अधिकारी हैं . नाम है अंकिता शर्मा जो छतीसगढ़ के राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक हैं . मीडिया वालों ने इनको लेडी सिंघम नाम दे डाला है . उन्होंने विजयदशमी के दिन पारंपरिक ‘शस्त्र पूजा’ (हथियारों की पूजा) के दौरान यह फायरिंग की थी .
एसपी अंकिता शर्मा ( sp ankita sharma) के फायरिंग वाले वीडियो को देखकर भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने कहा कि हथियार को “बहुत ही खतरनाक और गलत तरीके” से पकड़ा गया था . उन्होंने आरोप लगाया कि हथियार संभालने से जुड़े सुरक्षा नियमों का पूरी तरह उल्लंघन किया गया.

उन्होंने आगे कहा, “एक लोडेड (गोली भरे हुए) हथियार को हर दिशा में घुमाया जा रहा था. पीछे खड़े लोग साफ तौर पर डरे हुए दिख रहे थे. बिना अनुमति के, गलत कपड़ों में सर्विस हथियार का इस्तेमाल किया गया. ट्रेनिंग अकादमियों में सिखाई जाने वाली हथियार संभालने की बुनियादी बातों का भी पालन नहीं किया गया. ”
उन्होंने इसे “बिना जिम्मेदारी के अधिकार का एक बुरा प्रदर्शन” बताते हुए कहा कि ऐसी गैर-जिम्मेदाराना हरकत से खुद को या दूसरों को चोट लग सकती है या किसी की जान भी जा सकती है. उन्होंने “अनुशासनहीनता के ऐसे कृत्यों” के लिए सजा की मांग की.
सैन्य असॉल्ट राइफल से फायरिंग करने के खतरों पर बात करते हुए, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आर.के. विज ने कहा कि ऐसा केवल किसी सुरक्षित जगह पर और पूरी सावधानी के साथ ही किया जाना चाहिए.
उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “परंपरा मुख्य रूप से हथियारों की पूजा करने की है, न कि उनसे फायरिंग करने की. इस तरह की फायरिंग से दुर्घटना का खतरा रहता है, इसलिए इससे बचना चाहिए.” एक आईपीएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पीटीआई को बताया कि खाली कारतूस चलाना, जिसे आमतौर पर ‘आवाज़ी कारतूस’ कहा जाता है, ‘शस्त्र पूजा’ परंपरा का हिस्सा है, जिसका पालन पूरे राज्य में किया जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर असली गोलियों (लाइव एम्युनिशन) का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.
अधिकारी ने आगे कहा कि हवा में चलाई गई गोली भी वापस नीचे आती है और आस-पास मौजूद लोगों को घायल कर सकती है.
मंगलवार को मीडिया के साथ कुछ और वीडियो भी साझा किए गए, जिनमें रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर सहित अन्य जिलों में पुलिसकर्मियों को इस रस्म के बाद हथियार चलाते हुए देखा जा सकता है.
अंकिता शर्मा वाले वीडियो के बारे में पूछे जाने पर,छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार इस मामले का संज्ञान लेगी.
कारण बताओ नोटिस :
राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (inspector general) अजय यादव ने दावा किया है कि पुलिस मुख्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, क्योंकि यह हरकत पुलिस के हथियार इस्तेमाल करने के नियमों के खिलाफ थी. मुख्यालय ने अंकिता शर्मा से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि मुख्यालय ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि वायरल वीडियो पर आ रही नकारात्मक टिप्पणियों से पुलिस बल की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने कहा – एसपी (अंकिता शर्मा) का जवाब मिलने के बाद, मैं अपनी टिप्पणी दर्ज करूंगा और मामले को पुलिस मुख्यालय भेज दूंगा.”
दुर्ग में पैदा हुई 35 वर्षीय अंकिता शर्मा भारतीय पुलिस सेवा के 2018 बैच की अधिकारी हैं . उनके पति विवेकानंद शुक्ला सेना में अधिकारी हैं . अंकिता छत्तीसगढ़ की ऐसी पहली महिला हैं जो आईपीएस बनीं. उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में भी हिस्सा लिया है .










