जाल में फंसी सैनिक अधिकारी की पत्नी ने गोपनीय जानकारियां विदेशियों जासूसों को दे डाली

5
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने थल सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. आरोप है कि उस महिला ने  चीन सहित विदेशी खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों को संवेदनशील जानकारियां मुहैया कराई .  असल में यह विदेशी जासूसों का एक जाल था जिसमें ये लोग खुद को शिक्षाविद (academician) बताकर महिला के संपर्क में आए थे.

आरोपी महिला सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी है और मूल रूप से तेलंगाना की रहने वाली है. फिलहाल वह जम्मू के गांधी नगर पुलिस थाना क्षेत्र में रह रही है.  बताया जा रहा है कि वह अनजाने में ही उन विदेशियों के  जाल में फंस गई.  उसे पता ही नहीं चला कि जिन लोगों से वह बातचीत कर रही थी, वे शिक्षाविद नहीं, बल्कि चीन की खुफिया एजेंसियों के एजेंट थे.

गांधी नगर थाने में ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923’ की धारा 3 और 5, तथा ‘भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस ) की धारा 152 और 61(2) के तहत प्राथमिकी  (संख्या 290/2026) दर्ज की गई है.

‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ (Official Secrets Act) की धारा 3 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक जानकारी जुटाने या उसे साझा करने से जुड़े अपराध आते हैं. वहीं, धारा 5 के तहत संरक्षित जानकारी को गलत तरीके से साझा करने, अपने पास रखने या संभालने से संबंधित  अपराध आते हैं.

खुफिया एजेंसियों की शुरुआती  पड़ताल के मुताबिक , चीन के कुछ एजेंट शिक्षाविद बनकर महिला के संपर्क में आए. उन्होंने महिला से रणनीतिक और ऑपरेशनल महत्व के विषयों पर यह कहकर  लेख और सामग्री लिखवाई कि इसे प्रकाशित किया जायेगा.  शुरुआत में उन्होंने महिला से पर्यावरण और भू-राजनीति (geopolitics) जैसे विषयों पर लिखवाया, और धीरे-धीरे उसे रक्षा (defence ) से जुड़े मुद्दों पर लिखने के लिए प्रेरित किया.

जांचकर्ताओं को शक  है कि महिला अनजाने में एक ‘बौद्धिक जाल’ (intellectual trap) में फंस गई. उसे इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि जो लोग शिक्षाविद बनकर उसके पास आए थे, वे असल में खुफिया एजेंट थे जो उससे संवेदनशील जानकारी निकालना चाहते थे.

आरोप है कि वह गुप्त रूप से संवेदनशील दस्तावेज, तस्वीरें और इलेक्ट्रॉनिक डेटा जुटा रही थी, उन्हें अपने पास रख रही थी और आगे भेज रही थी.  इन चीजों का सीधा संबंध देश की सुरक्षा से है. आशंका है कि यह जानकारी एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों (encrypted communication channels ) यानि सुरक्षित संचार माध्यमों के जरिए विदेशी खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों को भेजी जा रही थी.

पुलिस की एफआईआर में खास तौर  से चीन और अन्य विदेशी देशों का जिक्र है,  यह मामला क्योंकि  अभी भी जांच के दायरे में है, इसलिए कथित तौर पर जुटाए गए दस्तावेज़ों की सटीक प्रकृति, संदिग्ध विदेशी संपर्कों की पहचान और जानकारी के आदान-प्रदान के दायरे के बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया है.