वायु सेना प्रमुख एपी सिंह ने आखिरी उड़ान भी पहले उस्ताद के साथ भरी

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भारतीय वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और उनके इंस्ट्रक्टर सेवानिवृत्त विंग कमांडर वीएस कोचर.
भारतीय वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और उनके इंस्ट्रक्टर सेवानिवृत्त विंग कमांडर वीएस कोचर.

इसी महीने के आखिर में रिटायर होने वाले भारतीय वायु सेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ( air chief marshal a p singh) ने मंगलवार को उस पायलट के साथ वर्दी में समापन उड़ान भरी, जिसने उन्हें 42 साल से भी पहले विमान उड़ाना सिखाया था. यह पायलट हैं सेवानिवृत्त विंग कमांडर वीएस कोचर और विमान भी वही ‘हिंदुस्तान जेट ट्रेनर किरण मार्क-1’.

इसके साथ ही उनके उड़ान करियर का एक अध्याय पूरा हो गया.  इससे पहले, 12 अक्टूबर को वायु सेना प्रमुख ने जोधपुर में तेजस जेट ( tejas jet ) में अपनी आखिरी ‘फाइटर जेट सॉर्टी’ (उड़ान) पूरी की थी.

भारतीय वायु सेना ने बताया कि “यह 55 मिनट की उड़ान बहुत खास थी, क्योंकि वायु सेना प्रमुख ने अपने पहले उड़ान प्रशिक्षक, विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर्ड) के साथ उड़ान भरी.”

यह मौका प्रशिक्षक और छात्र के बीच एक भावुक पुनर्मिलन जैसा था, जिसने वायु सेना प्रमुख को भारतीय वायु सेना में उनके उड़ान सफर की शुरुआत से फिर से जोड़ दिया. यानि उस्ताद और शागिर्द ने चार दशक पुराने पल फिर से जीये.

वायु सेना प्रमुख ने अपनी पहली उड़ान 28 जनवरी, 1984 को भरी थी. सैन्य विमानन की दुनिया में, प्रशिक्षक अपने प्रशिक्षुओं के लिए जीवन भर एक मार्गदर्शक (मेंटर) बने रहते हैं.

चार दशक से भी अधिक समय बाद, ‘किरण’ विमान में आज की इस उड़ान ने उनके वायु सेना के सफर को एक पूर्ण चक्र (full circle) प्रदान किया.  यह एक पायलट, उनके प्रशिक्षक और उस आसमान के बीच के गहरे बंधन को दर्शाता है, जो उनके पेशेवर जीवन को आकार देता है.

वायु सेना ने कहा कि यह अवसर भारतीय वायु सेना में उड़ान प्रशिक्षण की समृद्ध परंपरा और वायु योद्धाओं की कई पीढ़ियों को तैयार करने में उड़ान प्रशिक्षकों की अमूल्य भूमिका के प्रति एक सम्मान था.

‘किरण’ विमान – जो वायु सेना के पायलटों के प्रशिक्षण से जुड़ा एक प्रतिष्ठित ट्रेनर विमान है – में वापसी ने इस उड़ान को और भी खास बना दिया.

वायु सेना ( air force )  ने कहा कि वायु सेना प्रमुख को उनके शुरुआती उड़ान के दिनों में मार्गदर्शन देने वाले  विंग कमांडर कोचर (रिटायर्ड) की मौजूदगी  ने इस पल को बहुत अर्थपूर्ण बना दिया.  इससे वायु सेना प्रमुख की पहली उड़ान की यादें और उनके वायु सेना के उड़ान सफर का समापन एक साथ जुड़ गए.