सीआरपीएफ के डॉक्टर ने सड़क पर डिलीवरी करवा जच्चा – बच्चा की जान बचाई

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सीआरपीएफ के डॉक्टर ने सड़क पर करवाई डिलीवरी
सीआरपीएफ की 153 बटालियन के डॉ सम्पत चिन्नागेलुर की बाहों में नवजात

नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले छत्तीसगढ़ में सामने आई  यह सच में मानवता की जीत की एक ऐसी कहानी है जो हे किसी को खुश कर दे . केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल ( सीआरपीएफ – crpf) ने इस सच्ची और सुन्दर कहानी को फोटो के साथ अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट किया है .

दरअसल ये घटना  छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर ज़िले की हैं . यहां दूरदराज़ के एक गांव में रहने वाली एक महिला को प्रसव पीड़ा हुई . उसके परिवार के लोग जब चिकत्सीय मदद के लिए अस्पताल  ले जाने लगे तो गर्भवती महिला की हालत और बिगड़ गई.

अस्पताल के रास्ते में गर्भवती  महिला की स्थिति नाज़ुक होते देख किसी ने पास में तैनात सीआरपीएफ से मदद लेने के लिए खबर पहुंचाई. वहां पर सीआरपीएफ की 153 वीं बटालियन तैनात है . जच्चा और बच्चा की जान को खतरा पैदा हो गया था . तभी सीआरपीएफ 153  बटालियन से आए डॉक्टर ने तुरंत निर्णय लिया . समय बहुत कम था लिहाज़ा तय हुआ किया प्रसव वहीँ कराया जाए. अस्पताल तक ले जाने का वक्त नहीं था . लिहाज़ा खेत खलियान के पास ही बीच रास्ते में आड़ लगाकर डिलीवरी कराई गई .

सीआरपीएफ  के मुताबिक़ प्रसव के बाद महिला भी ठीक है . उसने कन्या को जन्म दिया . नवजात बच्ची भी सुरक्षित है .

छत्तीसगढ़ में हिंसक नक्सलियों से निपटने के लिए बरसों से तैनात सीआरपीएफ  हालात को काबू करने की लगातार कोशिश कर रही है . इस दौरान कई नक्सली मारे जा चुके हैं , कई गिरफ्तार हुए हैं और कइयों ने सरेंडर भी किया है लेकिन यह भारी कीमत पर हुआ है . इसके लिए सीआरपीएफ के सैंकड़ों जवानों को अपनी जान तक ग्नावानी पड़ी और कई अपने अंग गंवाकर हमेशा के लिए अपाहिज भी हो गए.

नक्सल प्रभावित इलाकों में सीआरपीएफ  सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत स्थानीय लोगों और विशेषकर वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए भी काम कर रही है . इसमें उनको चिकित्सा सुविधा से लेकर बच्चों की फ्री  शिक्षा तक का प्रबंध करना शामिल है . ये कार्यक्रम मानवीय आधार पर चलाए जा रहे हैं जिनका बड़ा मकसद तो शासन के प्रति स्थानीय लोगों का भरोसा पैदा करना है . साथ ही यह हिंसक माओवादियों /नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की भी एक कोशिश है .