गोवा में टूरिस्ट पुलिस बनाने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाया जाएगा

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गोवा

गोवा में सैलानियों के साथ होने वाले अपराध और सैलानियों की ज्यादा आवाजाही वाले स्थानों पर गैर  कानूनी काम रोकने के साथ सुरक्षा बढ़ाने के लिए टूरिस्ट पुलिस गठन किया जाना है . इसके लिए गोवा विधानसभा में आगामी मानसून सत्र में बिल लाया जाएगा जिसका मसौदा  2023 में  तैयार कर लिया गया था . इस बिल के पास होने से पर्यटन सुरक्षा बल गठन का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

गोवा में वर्तमान व्यवस्था के रहते 160 किलोमीटर लम्बी  समुद्री रेखा असरदार पर गश्त और निगरानी कर पाना मुश्किल है. ऐसे में  यहां की विभिन्न बीच पर  शराब और ड्रग्स का सेवन,  दलालों की गतिविधियां , धोखाधड़ी आदि जैसी घटनाओं के कारण  बड़ी समस्या बनी हुई है. इन पूरे हालात से निपटने के लिए एक ऐसे बल की ज़रूरत महसूस की गई जो आतिथ्य और पर्यटन ( hospitality and tourism ) के विभिन्न पहलुओं की समझ रखती हो और उसके पास हर तरह के हालात से निपटने के अधिकार , संसाधन व क्षमता हो.

गोवा में  देश के अलग अलग हिस्सों से ही नहीं  विदेश से भी खासी संख्या में सैलानी आते हैं और क्योंकि गोवा की अर्थव्यवस्था में राजस्व की दृष्टि से पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है इसलिए पर्यटकों की सुविधा व सुरक्षा को प्राथमिकता दिया जाना स्वाभाविक है .  पर्यटन व  कानून व्यवस्था , दोनों अलग अलग विभाग हैं और उनकी प्राथमिकताएं भी अलग अलग है. ऐसे में कई दफा कुछ मामलों में कार्रवाई करने के लिए , इनके बीच आपसी तालमेल की कमी , पेचीदा या चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां पैदा कर देती है. इन हालात का समाधान एक ऐसे बल के रूप में देखा गया जिसके पास पर्यटन व क़ानून की समझ के साथ पुलिस की शक्तियाँ भी हों तथा जो एक ही अधिकारी के  नेतृत्व के तहत काम करें. प्रस्तावित सुरक्षा बल के गठन के लिए लाए जाने वाले बिल  में वह तमाम तमाम तत्व शामिल किये गए हैं जो इन ज़रूरतों को पूरा करते हों.

पर्यटन सुरक्षा बल के पास ‘दलालों’ के लिए गिरफ़्तारी और जुर्माना लगाने की शक्ति होगी, पर्यटन उद्यमों के लिए ‘स्थायित्व’ शुल्क  ( sustainability fee ) और स्थायी पर्यटन ( sustainable tourism) के लिए प्रोत्साहन – ये कुछ ऐसे बदलाव हैं जो अगले महीने राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने  वाले पर्यटन विधेयक के मसौदे में प्रस्तावित हैं.

राज्य के पर्यटन विभाग द्वारा तैयार किया गया किया ‘गोवा पर्यटन संवर्धन, प्रबंधन और विनियमन विधेयक, 2024’ (The Goa Tourism Promotion, Management and Regulation Bill, 2024 ) नामक इस प्रस्तावित कानून का घोषित उद्देश्य, पर्यटन पर लागू कानूनों को समेकित और संशोधित करना और “राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा, संरक्षण और उसे बनाए रखना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह पर्यटकों के लिए पसंदीदा गंतव्य बना रहे.”

प्रस्तावित मसौदा विधेयक राज्य पर्यटन को नियंत्रित करने वाले दो मौजूदा कानूनों – गोवा, दमन और दीव पर्यटक व्यापार पंजीकरण अधिनियम, 1982 और गोवा पर्यटक स्थल (संरक्षण और रखरखाव) अधिनियम, 2001 को निरस्त कर देगा.

मसौदे में कहा गया है, “पर्यटन सुरक्षा बल के पास गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध के मामले में गिरफ्तारी करने, उल्लंघन के लिए किसी भी व्यक्ति की तलाशी लेने और उसके सामान को जब्त करने, साक्ष्य एकत्र करने और उपद्रव और दलाली के अपराधों के लिए जुर्माना लगाने और वसूलने का अधिकार होगा.” साथ ही कहा गया है कि बल “पर्यटन क्लस्टर में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सभी विभागों और संस्थाओं के साथ तालमेल  करेगा. ”

मसौदा विधेयक में कहा गया है कि राज्य के पर्यटन निदेशक पर्यटन सुरक्षा बल की तैनाती के लिए जिम्मेदार होंगे.  इस बीच, “पर्यटक रक्षक” (tourist guard ) पर्यटकों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम में अधिकारियों की सहायता करेंगे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे.  मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध शराब की बिक्री या अवैध शराब के सेवन को रोकने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सहायता करेंगे. अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेंगे, दलालों के बारे में पर्यटकों को सचेत करेंगे और आवश्यक कार्रवाई करने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की सहायता करेंगे.

गोवा पुलिस के पास पहले से ही एक विशेष “पर्यटक पुलिस”  (tourist police ) इकाई है.  1990 में स्थापित इस इकाई का उद्देश्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

पुलिस की वेबसाइट के अनुसार: “पर्यटक पुलिस, आने वाले पर्यटकों के लिए कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने के अलावा, राज्य में पर्यटन संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले गोवा पर्यटक व्यापार पंजीकरण अधिनियम, 1982 के प्रावधानों के कार्यान्वयन में पर्यटन विभाग की मदद भी करती है. ”

पर्यटन मंत्री रोहन खाउंते ( tourism minister rohan khaunte) ने कहा कि दलाली और अन्य अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एक कानूनी ढांचे की ज़रुरत  है, क्योंकि मौजूदा प्रावधानों के तहत अपराधी अक्सर कड़ी सजा से बच जाते हैं.