राष्ट्रपति भवन में सेना की क्या होती है चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी जो इस शनिवार नहीं होगी

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गार्ड परिवर्तन समारोह
गार्ड परिवर्तन समारोह

भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में हरेक शनिवार को होने वाली चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी इस शनिवार को नहीं होगी. ऐसा निर्णय ब्राजील के राष्ट्रपति की यात्रा की वजह से किया गया है. निर्धारित राजकीय यात्रा कारण इस रक्षा मंत्रालय की तरफ से एक बयान में दी यह गई जानकारी दी गई है .

उल्लेखनीय है कि ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा भारत के पांच दिन के दौरे पर कल ( 18 फरवरी ) को नई दिल्ली पहुंचे हैं .

रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में एक वाक्य में दी गई सूचना में कहा है , ” ब्राजील के राष्ट्रपति की निर्धारित राजकीय यात्रा के कारण इस शनिवार (21 फरवरी, 2026) को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में राष्ट्रपति सुरक्षा गार्डो का चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी नहीं होगा.”

क्या होता है इस सैन्य परम्परा में : दरअसल राष्ट्रपति भवन में चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी (change of guards ceremony) हरेक हफ़्ते के शनिवार को आयोजित होने वाली एक सेना की एक ऐसी परम्परा है जिसमें राष्ट्रपति के अंगरक्षक सैनिकों ( president’s bodyguard ) की एक नई टुकड़ी प्रभार लेती है. इसमें 30 से 50 मिनट का शानदार घुड़सवारी और म्यूजिकल शो होता है. सजेधजे सैनिक घुड़सवारों का आगमन और शानदार ब्रास बैंड का म्यूजिकल शो एक लग ही तरह के आनंद की अनुभूति कराता है. राष्ट्रगान की साथ सेना के इस परम्परागत कार्यक्रम का समापन होता है.

चेंज ऑफ़ गार्ड्स का तरीका : 
समारोह की शुरुआत सेना के बैंडकर्मियों के आने से होती है. वह अपनी जगह ले लेते हैं तब परेड कमांडर का आगमन होता है. प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड के सैनिक साउथ कोर्ट से घोड़े पर सवार होकर संगीत के साथ आते हैं. इसके बाद औपचारिक निरीक्षण और सलामी के बाद पुराने गार्ड की जगह नए गार्ड को लाया जाता है.

देश विदेश से आने वाले मेहमान और पर्यटक इस उत्सव जैसी सैन्य परम्परा को देखते हैं . इसके लिए टिकट लेना पड़ता है जो राष्टपति भवन की वेबसाइट से ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है . आमतौर पर इसका समय सुबह 8.30 बजे के आसपास होता है .

भारत में राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होने के साथ साथ तीनों सेनाओं का प्रमुख होता है. इसलिए राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति के तमाम औपचारिक कार्यक्रमों के आयोजन में सेना की भूमिका अहम होती है. तीनों सेनाओं की नुमाइन्दे के तौर पर एक एक अधिकारी राष्ट्रपति के साथ रहता है जिसे एडीसी कहा जाता है . इस पद पर सेवा करना किसी भी अधिकारी के लिए शानदार अनुभव और गर्व का विषय माना जाता है .