बोमडिला पर IAS की एकजुटता : सोशल मीडिया पर सेना का समर्थन तेज

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बोमडिला
पुलिस और सेना के जवानों के बीच टकराव टालने के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बोमडिला में सेना के अधिकारियों से बातचीत की.

अरुणाचल प्रदेश के बोमडिला की घटना के बाद पुलिस और सेना के जवानों में हुए टकराव से उत्पन्न हालात सम्भालने के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बोमडिला में अधिकारियों से बातचीत की. इस बीच पश्चिम केमंग के ज़िला पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के समर्थन में आईएएस अधिकारियों के संगठन की तरफ से रक्षा सचिव को लिखे गये पत्र पर सैन्य क्षेत्र से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. जहां आईएएस अधिकारियों के शीर्ष संगठन ने भी दबाव डालना शुरू किया तो वहीं सैन्य अधिकारी और कईं वरिष्ठ रिटायर्ड सैन्य अधिकारी भी 2 बटालियन अरुणाचल स्काउट्स के कमांडिग अफ़सर कर्नल एफबी फिरदौज़ की हिमायत कर रहे हैं.

बोमडिला
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने नागरिक प्रशासन के अधिकारियों एसपी और डीएम से भी बात की.

सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये पूरा मामला स्थानीय पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के रवैये की वजह से बिगड़ा. उनका कहना है सबसे बड़ी गलती तो सैनिकों को गिरफ्तार करके पुलिस हिरासत में रखे जाने की ही है. उनके मुताबिक ऐसे हालात में सैनिक के पकड़े जाने पर पुलिस को उसकी यूनिट को खबर करके सेना के हवाले कर देना चाहिए था. सेना खुद ऐसे मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करती.

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विनोद भाटिया @Ptr6Vb ने लिखा है कि इस मामले में तार्किक और साफ जाँच की ज़रूरत है लेकिन ताकतवर आईएएस संगठन के प्रभाव और रक्षा सचिव को लिखे पत्र से पता चलता है कि क्या होगा. ट्विटर पर टिप्पणी के साथ लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विनोद भाटिया ने पत्र की कॉपी भी अटैच की है. जनरल भाटिया मिलिटरी आपरेशंस के महानिदेशक (डीजीएमओ) भी रहे हैं.

एक अन्य रिटायर्ड अधिकारी @manmohan16 ने सवाल दागा है कि इस मामले में ADGPI का क्या रुख है? क्या ऊँचे अफसर कमांडिंग अधिकारी को उसके भरोसे छोड़ देंगे? उनकी टिप्पणी है – ये ‘हमारे और उनके’ जैसा कोई केस नहीं है, ये निष्पक्षता, न्याय और सैनिक के गर्व से जुड़ा है. उम्मीद की जाती है कि वर्दीधारी ऊँची अफसर अपनी रीढ़ खोजें!

सोशल मीडिया पर लगातार बने रहने वाले वकील और भारतीय सेना के पूर्व मेजर नवदीप सिंह @SinghNavdeep ने अपने ट्वीट में लिखा है कि गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाये गये और पूरी रात निर्दयता से पीटे गये दो सेवारत सैनिकों को छुड़ाने के लिए उनके कमांडर के खुद जाने की हिम्मत करने के लिए कमांडर को कसूरवार ठहराया जा रहा है!

मेजर गौरव आर्य ने @gauravarya ने कमांडिग अधिकारी का वायरल हुआ वीडियो अटैच करते हुए अपने ट्वीट में कहा कि मैं इस अधिकारी को नहीं जानता लेकिन मैं इन्हें हज़ार बार सलाम करता हूँ. यही कारण है जो सीओ (CO) का काल साइन (call sign) टाइगर है. मेजर गौरव आर्य ने आरोप लगाया है कि आईएएस अधिकारियों की एसोसिएशन ने एकतरफा बात बताई है और प्रेस इसमें शामिल हो गया है.

मेजर गौरव आर्य के ट्वीट को 7 हज़ार से ज़्यादा लाइक्स मिले और ढाई हज़ार से ज़्यादा बृहस्पतिवार सुबह तक लोगों ने रीट्वीट किया जिनमें लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन @atahasnain53 भी हैं. जनरल सैयद अता हसनैन वर्तमान में कश्मीर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर भी हैं. उन्होंने भी कमांडिंग अफसर के अपने सैनिकों के समर्थन के रुख की प्रशंसा की और समर्थन किया.

2 COMMENTS

  1. How is this Srivastava chap writing in “capacity of Head of a Private, non governmental organization” using his position & the Letter Head of a Ministry, Govt Of India ?
    This is a serious infringement of the Service Rules.
    And (tent)amounts to browbeating & intimidation’s of the Defense Secretary Govt of India.
    Especially, when the matter is, apparently, being resolved at the highest Political level!?
    Serious note should be taken of this IAS fellow & his… association’s interference.
    I too, join in, whole heartedly to support this brave and courageous CO
    Veeru C.

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