भैजी, मैं गांव पहुंच गया , पानी का क्या करना है ? यह कहकर कर्नल नेगी ने भौंचक्का कर दिया

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कर्नल यशपाल नेगी और उनकी पत्नी बीना नेगी (फाइल फोटो)
एक कर्नल ऐसा जो …
– यह न तम्बोला खेलता है और न ही गोल्फ..!
– यह कुदाल-फावड़ा चलाता है, बंजर खेतों को आबाद करता है..!
अगस्त या सितम्बर 2020 की बात है. मुझे याद नहीं लेकिन कहीं से मुझे एक कर्नल का नंबर मिला. यह कर्नल उस दौरान कुछ समय पहले ही रिटायर हुआ था और दिल्ली में निवास था. मैंने बात की तो कर्नल ने कहा, ” मैं अपने गांव पौड़ी जाना चाहता हूं”. मैंने हंसकर कहा, “रिवर्स माइग्रेशन “. वो बोले, ” हां, बस मेरे गांव में पानी की दिक्कत है”.
मैंने यूं कह दिया कि आपके गांव में पानी की समस्या के समाधान के लिए मैं भी  प्रयास करूंगा.
मैंने कर्नल पर एक स्टोरी लिखी जो उत्तरजन टुडे के सितम्बर 2020 के अंक में प्रकाशित हुई. मैं स्टोरी पब्लिश्ड कर भूल गया. मुझे लगा कि कर्नल यूं ही बात कर रहे होंगे. भला कोई गांव क्यों जाएगा ? दिल्ली या दून में गोल्फ और तम्बोला खेलेगा.
कोरोना काल था. फिर एक दिन अचानक ही मुझे कर्नल का फोन आया. ” भैजी, मैं गांव पहुंच गया. पानी का क्या होगा? ” मैं भौंचक्का रह गया.
 कर्नल अपनी पत्नी के साथ गांव पहुंच चुके थे. उस समय पेयजल निगम में चीफ इंजीनियर एससी पंत थे. बाद में वो पेयजल निगम के एमडी भी बने.  मैंने उनसे बात की. कर्नल ने भी बात की. संभवतः गांव में पानी की समस्या का हल निकल आया.
जी हां, मैं बात कर रहा हूं पौड़ी के वीरोंखाल ब्लाक के वीरगणा गांव के कर्नल यशपाल नेगी की. कर्नल नेगी आर्डिनेंस में थे. उन्हें देश सेवा विरासत में मिली. पिता भी सेना में थे और अब बेटा भी सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर है. कर्नल नेगी ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया था. वह सेना में सिपाही भर्ती हुए और फिर एसएसबी के माध्यम से अफसर बने.
कर्नल यशपाल नेगी अपनी माटी और थाती के लिए समर्पित हैं. रिटायर होने के बाद गांव पहुंचे और अपने बंजर खेतों को अपनी पत्नी बीना के साथ मिलकर खोदने लगे. बंजर खेतों में अब फसल लहलहाती है.गांव के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाते और सिखाते हैं. गांव के लोगों को प्राडक्टिव बनाने की दिशा में काम करते हैं.
इस बार पंचायत चुनाव में उनके गांव के लोगों ने उन्हें निर्विरोध अपना प्रधान चुन लिया है. यह एक बड़ी चुनौती है.
सांसद, विधायक और ब्यूरोक्रेट ने गांव गोद लिए हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा है लेकिन इस कर्नल में कुछ खास बात है तो मुझे उम्मीद है कि यह अपने गांव की तस्वीर और तकदीर बदलेगा और दूसरों के लिए प्रेरणा बनेगा कि यदि चाहे तो आज भी पहाड़ आबाद हो सकता है. यदि चाहें तो आज भी बंजर खेतों पर फसल लहलहा सकती है. यदि चाहें तो धार पार मोड काटती बस में बेटे को परदेस जाते देख मां की आंखों से बहने वाले आंसू पोंछे जा सकते हैं. बूढ़े मां-बाप के चेहरों पर मुस्कान लाई जा सकती है.
इस कर्नल को दिल से सैल्यूट तो बनता है.
( यह स्टोरी पत्रकार  गुनानंद जखमोला #GunanandJakhmola की फेसबुक वाल से साभार ली गई है.)