हिंसा अब चौथे दिन भी जारी दिखी . गुरुवार को नेपाल आर्मी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों के दो गुटों के बीच झड़प हो गई, जबकि अंतरिम नेता चुनने के लिए बातचीत चल रही थी.
गवाहों के मुताबिक, दशकों में नेपाल के सबसे बड़े प्रदर्शनों की अगुआई कर रहे युवा प्रदर्शनकारियों के ग्रुप के बीच विवाद हुआ जो जल्द ही झड़प में बदल गया .
2024 में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनरल सिग्देल को भारतीय सेना के मानद जनरल का पद दिया – जो भारत और नेपाल के बीच मजबूत सैन्य संबंधों का प्रतीक है।
सिग्देल ने भारत और चीन में सैन्य कार्यक्रम में भाग लिया था .
त्रिभुवन विश्वविद्यालय से एमए पास करने वाले अशोक राज सिग्देल ने भारत और चीन में सैन्य कार्यक्रमों में प्रशिक्षण लिया. वे चीन की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से स्ट्रेटेजिक स्टडीज में मास्टर हैं. वर्षों में, उन्होंने नेपाल, चीन और भारत में व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किया.
सिग्देल ने भारत के सिकंदराबाद में डिफेंस मैनेजमेंट कॉलेज में डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स किया.नेपाल में नगरकोट और आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में उन्नत पाठ्यक्रमों ने उनकी सैन्य शिक्षा को और बेहतर बनाया.
सेना में अपनी सेवा के दौरान, सिग्देल ने नेतृत्व वाली कई भूमिकाएं निभाईं. उन्होंने बटालियन, ब्रिगेड और डिवीजन की कमान संभाली, सैन्य संचालन के निदेशक, इंस्पेक्टर जनरल और स्टाफ ड्यूटी के महानिदेशक के रूप में कार्य किया और आर्मी चीफ के सैन्य सहायक रहे. उन्होंने काउंटर इंसर्जेंसी और जंगल वारफेयर स्कूल का नेतृत्व किया और 2019 में कोविड क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर का भी नेतृत्व किया.
2022 में, उन्होंने यूएस-नेपाल लैंड फोर्स वार्ता में नेपाल का प्रतिनिधित्व किया, जिससे एक सैन्य राजनयिक के रूप में उनकी क्षमता का पता चला.
सिग्देल के पास शांति मिशन का भी महत्वपूर्ण अनुभव है, वे यूनाईटेड नेशंस मिशन में यूगोस्लाविया, ताजिकिस्तान और लाइबेरिया में तैनात रहे. अपनी सेवा के लिए, उन्हें सुप्रबल जनसेवाश्री III से सम्मानित किया गया – यह नेपाल सरकार द्वारा उत्कृष्ट सार्वजनिक सेवा के लिए व्यक्तियों को दिया जाने वाला एक नागरिक सम्मान है .
भारत के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सिग्देल को उनकी उत्कृष्ट सैन्य क्षमता और भारत के साथ नेपाल के लंबे और मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारतीय सेना के मानद जनरल का पद दिया गया.
1950 से नेपाल और भारत के सेना प्रमुखों को मानद जनरल का खिताब देने की एक अनोखी परंपरा रही है.













