फेस्टिवल के पहले दिन की शुरुआत सरबप्रीत सिंह के सत्र ‘ए मेलोडियस प्रीफेस : ख्वाबगाह : द हाउस ऑफ ड्रीम्स’ से हुई. फिर लिटरेरी फेस्टिवल के निदेशक और दिवंगत लेखक व पत्रकार खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने स्वागत भाषण दिया. उन्होंने अपने पिता को अनुशासनप्रिय और हास्यबोध की एक बेजोड़ मिसाल के तौर पर याद किया.
जनरल नरवणे ने ‘केएसएलएफ फॉरएवर यंग’की शुरुआत की :
कार्यक्रम के दौरान भारत के पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने ‘केएसएलएफ फॉरएवर यंग’ पहल की शुरुआत करते हुए युवा लेखकों को विशेष संदेश दिया . इस पहल का प्रमुख मकसद युवा और उभरते लेखकों को रचनात्मक लेखन के प्रति प्रेरित करना है. जनरल नरवणे ने युवा लेखकों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना और लेखन दोनों ही महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुशासन का होना बेहद जरूरी है.
जनरल मनोज नरवणे ने युवा लेखकों से अपील की कि वे गंभीर मुद्दों पर बिना किसी व्यक्तिगत दुर्भावना के अपनी बात रखें. उन्होंने कहा कि वैचारिक मुद्दों पर असहमति जरूर जताएं, लेकिन किसी भी शख्स का अनादर न करें. निडर लेखन का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि लेखकों को हमेशा जिम्मेदारी के साथ लिखना चाहिए तथा तलवार की तरह ही कलम का इस्तेमाल भी पूरे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए.
आन्दोलन प्रेशर कुकर की सीटी जैसे :
जनरल नरवणे ने एक कार्यक्रम में सवाल के जवाब में देश में चल रहे आंदोलनों पर कहा कि समाज भी प्रेशर कुकर की तरह है, जिसमें प्रेशर बढ़ते ही सीटी बजते समय प्रेशर रिलीज होता है. इसलिए जो लोग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं उन्हें करने देना चाहिए, ताकि समाज का प्रेशर बाहर आता रहे. आंदोलन के पीछे की वजहों का पता लगाकर उनका समाधान निकालने के भी प्रयास करने चाहिए.
यह सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के खिलाफ युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर चल रहे माहौल के संदर्भ में था. ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA), ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन से जुड़े कुछ समूहों के नेतृत्व में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित हैं. इनमें बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप भी शामिल है.
जनरल नरवणे ने कहा कि हमारे पड़ोसी देशों में कुछ साल से कई तरह के आंदोलन चल रहे हैं, लेकिन हमारा देश फिर भी आगे बढ़ रहा, अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है. इसका मतलब कुछ तो हम सही कर रहे हैं. आज हम चीन की बराबरी की अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ रहे हैं, व्यापार में भी. पहले हमारा डिफेंस पीएसयू ( psu ) के सहारे था , लेकिन आज कई निजी उद्योग डिफेन्स सेक्टर में आए हैं, तब से इसमें तेजी आई है.
अग्निवीर पर कहा :
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए जाने अग्निवीर सैनिकों के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई भी योजना सौ प्रतिशत सही नहीं होती. उसमें बदलाव की गुंजाइश रहती है और इसमें अगर बदलाव की जरूरत है तो वो होना चाहिए.
दो नए दोस्तों से पुराना एक होना अच्छा :
जनरल नरवणे ने कहा कि दो नए मित्रों से अच्छा एक पुराना दोस्त होता है. इसलिए हमें देखना चाहिए कि कौन मित्र देश हमारा बुरे समय में साथ देता आया है.










