बालेन के नाम से लोकप्रिय बालेन्द्र शाह ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने से पहले, अपने देश के भविष्य के प्रति आशावाद से भरा एक गीत जारी किया.
“अविभाजित नेपाली, इस बार इतिहास रचा जा रहा है,” उन्होंने एक ट्रैक में रैप किया, जिसे रिलीज़ होने के कुछ ही घंटों के भीतर 20 लाख से अधिक बार देखा गया. यह गीत उन्हें उनके ‘अंडरग्राउंड रैप’ के दिनों की याद दिलाता है, जहाँ उन्होंने संगीत का उपयोग करके नेपाल में भ्रष्टाचार और अन्य सामाजिक समस्याओं को उजागर किया था.
राजधानी काठमांडू के मेयर के तौर पर सिर्फ तीन साल बिताने के बाद, शाह ने ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ ( rastriya swatantra party) के साथ हाथ मिलाया और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने. इस महीने हुए आम चुनावों में उन्होंने निर्णायक जीत हासिल की.
बालेन के समर्थक उन्हें बदलाव का प्रतीक और नेपाल के पुराने राजनेताओं की नाकामियों से छुटकारा पाने का जरिया मानते हैं. वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठाते हैं कि क्या चार साल पुरानी आरएसपी अपने साहसी वादों को पूरा करने में सक्षम होगी.
शाह का जन्म 1990 में काठमांडू के नारादेवी में हुआ था और वे अपने माता-पिता के सबसे छोटे पुत्र हैं. उनके पिता एक आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं और उनकी माँ घरेलू महिला हैं . शाह विवाहित हैं और अपनी पत्नी तथा बेटी के साथ रहते हैं.
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने काठमांडू से और बाद में दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.
2013 में, नेपाल में एक लोकप्रिय ‘रैप बैटल’ जीतने के बाद वे रातों-रात मशहूर हो गए; उनके तीखे बोलों में उस पीढ़ी की हताशा झलकती थी जो खुद को दबा हुआ और उपेक्षित महसूस करती थी.
शाह ने इसके बाद कई लोकप्रिय गीत जारी किए, जिनमें नेपाल में व्याप्त भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता की आलोचना की गई थी. अपने खास चौकोर काले चश्मे, काले ब्लेज़र और काली पेंट के साथ, वे अपने संगीत वीडियो में एक बेहद अलग और आकर्षक अंदाज़ में नज़र आते थे.
उनके सबसे मशहूर गीतों में से एक, ‘बलिदान’ को यू ट्यूब ( YouTube) पर 1.4 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है. 2022 में, राजनीति में नए उतरे इस व्यक्ति ने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर का चुनाव भारी बहुमत से जीता था . उन्होंने उन पार्टियों को मात दी, जिनका यहां की चुनावी सियासत में दशकों से दबदबा रहा था.
मेयर के तौर पर उनका कार्यकाल शहर की साफ-सफाई, स्थानीय विरासत के संरक्षण और भ्रष्टाचार पर सख़्त कार्रवाई के प्रयासों के लिए जाना गया. उन्होंने अवैध इमारतों को बुलडोज़ करने का एक विवादित अभियान भी शुरू किया – जिससे ट्रैफिक की समस्या तो कुछ हद तक कम हुई, लेकिन साथ ही सड़क किनारे सामान बेचने वाले दुकानदारों और अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोगों की आलोचना भी उन्हें झेलनी पड़ी.













