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सीआरपीएफ ने कश्मीर के सोपोर में लगाया चिकित्सा शिविर

सीआरपीएफ
सीआरपीएफ के मेडिकल कैंप में इस तरह वृद्धों को चिकित्सा मदद मुहैया कराई गई.

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ CRPF) की तरफ से कश्मीर के सोपोर में लगाए गए चिकित्सा शिविर में 500 से ज्यादा स्थानीय निवासियों ने इलाज कराया, दवाएं लीं या सलाह मशविरा लिया. इसमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बूढे शामिल रहे. चिकित्सा सहायता के मकसद से ये मेडिकल कैंप सीआरपीएफ की 179वीं बटालियन ने चिंकीपुरा में लगाया था.

सीआरपीएफ
सीआरपीएफ का मेडिकल कैंप

CRPF के प्रवक्ता के मुताबिक इस नि:शुल्क मेडिकल कैंप को कोरोना वायरस संक्रमण और उसके इलाज व बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के जरिए के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया. लोगों को संक्रमण से बचने के लिए फेस मास्क के इस्तेमाल और सामाजिक दूरी की अवधारणा व अहमियत के बारे में बताया गया. लोगों को नि:शुल्क सेनेटाइजिंग किट भी दी गई.

सीआरपीएफ
सीआरपीएफ का मेडिकल कैंप

CRPF का ये मेडिकल कैंप, उसकी नागरिकों से नजदीकियां बढाने और स्थानीय निवासियों में सुरक्षा बलों के प्रति भरोसा बढाने की नीति का हिस्सा है. CRPF की 24 घंटे चलने वाली हेल्प लाइन मददगार भी इसी कवायद का एक हिस्सा है जो कश्मीर में लोगों की सहायता करने के कारण बेहद लोकप्रिय है.

सीआरपीएफ
सीआरपीएफ का मेडिकल कैंप

लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी राजीव कानितकर एमयूएचएस की नई उप कुलपति

माधुरी राजीव कानितकर
लेफ्टिनेंट जनरल डॉ माधुरी राजीव कानितकर

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी राजीव कानितकर को नासिक स्थित महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेस का नया उप कुलपति बनाया गया है. अनुभवी डॉक्टर माधुरी कानितकर वर्तमान में रक्षा मंत्रालय के अधीन एकीकृत रक्षा स्टाफ में उप प्रमुख (Deputy Chief in Integrated Defence Staff ) हैं. महाराष्ट्र के राज्यपाल और महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भगत सिंह कोशियारी ने लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर के इस पद पर पांच साल की नियुक्ति के आदेश दिए हैं.

माधुरी राजीव कानितकर
लेफ्टिनेंट जनरल डॉ माधुरी राजीव कानितकर

एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर की ये नियुक्ति पांच साल या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले पूर्ण हो, तक रहेगी. वैसे 15 अक्टूबर 1960 को जन्मी लेफ्टिनेंट (डॉ) माधुरी अभी 60 वर्ष की हैं. वह एक अनुभवी डॉक्टर होने के साथ साथ 22 साल के अध्यापन और शोध का भी तजुर्बा रखती हैं.

लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर ने पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है और दिलचस्प है कि कॉलेज में टॉप करने वाली डॉ माधुरी जनवरी 2017 से लेकर मई 2019 तक यहाँ डीन के ओहदे पर भी रहीं. बाल रोग में एमडी (MD in Pediatrics) के अलावा उन्होंने डीएनबी पीडियाट्रिक्स (DNB pediatrics) भी किया है.

पिछले साल मार्च में भारतीय सेना में डॉक्टर मेजर जनरल माधुरी कानितकर को तरक्की देकर अब लेफ्टिनेंट जनरल बना दिया गया था. भारतीय सेना में इस ओहदे तक पहुँची वह तीसरी महिला हैं. माधुरी कानितकर के पति भी लेफ्टिनेंट जनरल के ओहदे से रिटायर हुए थे. लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर को अब चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ (सीडीएस-CDS) के तहत एकीकृत रक्षा कमान (Integrated Defence Command- आईडीएस) मुख्यालय में तैनात किया गया था. यह कमान 2001 में गठित सेनाओं के विभिन्न अंगों के बीच विभिन्न प्रकार के तालमेल का काम करती है.

लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानितकर से पहले इस रैंक तक पहुँचने वाली महिला अधिकारी पुनीता अरोड़ा थीं जबकि उनके समकक्ष भारतीय वायुसेना की पद्मावती बंद्योपाध्याय रहीं जोकि भारतीय वायु सेना में एयर मार्शल थीं.

लेफ्टिनेंट जनरल बनीं माधुरी कानितकर, भारतीय सेना में ऐसी तीसरी महिला

दिल्ली पुलिस का सिपाही नरेंद्र एक गरीब के लिए बना मसीहा

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस में रेलवे शाखा में तैनात सिपाही नरेंद्र ने विजय कुमार की खोई रकम उन्हें वापस की.

दिल्ली पुलिस में रेलवे शाखा में तैनात सिपाही अपनी ईमानदारी और सूझबूझ के बूते पर हीरो बन गया है. हीरो भी ऐसा कि नरेंद्र की तारीफ़ खुद दिल्ली पुलिस के कमिश्नर बालाजी श्रीवास्तव ने पूरी दुनिया के सामने की और सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा कि हमें ऐसे ही साथियों की टीम चाहिए.

सिपाही नरेंद्र ने अपनी ईमानदारी और सूझ-बूझ से तारीफ़ ही नहीं बटोरी, एक मजदूर विजय कुमार की मेहनत की कमाई को बरबाद होने से भी बचा लिया जो उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शकूर बस्ती में रहता है. दरअसल, विजय कुमार ने 30 जून को अपने बैंक खाते से एक लाख रुपये निकाले थे और इन रुपये के साथ साथ करीब 55 किलो राशन लेकर उत्तर प्रदेश के खुर्जा जाना था. विजय खुर्जा का मूल निवासी है और वहां की ट्रेन पकड़ने के लिए शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन पहुंचा. विजय बरेली-नई दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस में सवार हुआ. राशन के दो बैग रखने के दौरान वह स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर रखा वो बैग भूल गया जिसमें कुछ और सामान के साथ साथ एक लाख रुपये भी थे. बैग बेंच पर ही छूट गया था.

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन थाने पर तैनात सिपाही नरेन्द्र कुमार तब शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी पर था और ट्रेन के जाने के बाद गश्त लगा रहा था. तभी उसकी निगाह लावारिस बैग पड़ी. नरेन्द्र ने कुछ यात्रियों से बैग के बारे में पूछा लेकिन उसके मालिक के बारे में पता नहीं चला.

दिल्ली पुलिस के सिपाही नरेंद्र ने बैग अपने पास ही रखने का फैसला किया. बैग की तलाशी लेने पर उसने पाया कि उसमें नकदी के दो बंडल में करीब एक लाख रुपये हैं. रुपये के अलावा उसमें कुछ रोटियां, पानी की बोतल, एक चेक बुक, बैंक की पासबुक, आधार कार्ड और राशन कार्ड भी था. नरेंद्र ने इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी. पुलिस ने विजय कुमार से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन जब संपर्क नहीं हो सका तो पुलिस ने इंतजार करने का फैसला किया.

लावारिस बैग मिलने के कुछ घंटों के बाद शाम साढ़े छह बजे विजय कुमार शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन लौटा और उसने अपने बैग के बारे में पूछताछ की. पुलिस ने कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बैग का सामान और एक लाख रुपये विजय को लौटा दिए.

विजय को बैग छूट जाने का अहसास आनंद विहार स्टेशन पर हुआ. जब प्यास लगने पर जब विजय पानी पीने के लिए ट्रेन से उतरा. विजय बहुत हैरान परेशान था क्योंकि ये रुपये मेरे लिएबहुत ही अहमियत रखते थे. विजय ने बच्चों के लिए छोटा सा घर बनाने के लिए इन रुपयों को काफी टाइम से जमा कर रहा था. वैसे भी एक लाख रुपये किसी के लिए भी अच्छी खासी रकम है.

विजय का कहना है कि मैं तो एक गरीब आदमी हूं और मेरे लिए एक लाख रुपये बहुत ही बड़ी रकम है. विजय तो बैग और रुपये मिलने की सारी उम्मीदें खो चुका था, लेकिन सिपाही नरेन्द्र उसके लिए मसीहा बनकर आया.

सिख रेजीमेंट का गणतंत्र दिवस परेड पर दो बार सलामी देने का राज़

गणतंत्र दिवस
राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड (फाइल)

वो 24 जनवरी 1979 की सर्द सुबह थी. भारत की राजधानी दिल्ली गणतंत्र दिवस के मौके पर शुरू होने वाले उन समारोहों को मनाने के लिए अंतिम तैयारी के दौर में थी जिनमें बन्दोबस्त की ज़्यादातर ज़िम्मेदारी सेना की ही होती है. 26 जनवरी को होने वाली उस तकरीबन 14 किलोमीटर के रूट वाली परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल शुरू हो चुकी थी जिसे राजपथ पर इण्डिया गेट के करीब, दाहिने हाथ पर बने सलामी मंच पर, राष्ट्रपति को सलामी देते हुये अलग अलग सड़कों से गुजरते आज़ादी के प्रतीक लाल किले पर सम्पन्न होना था.

दाहिने देख :

विजय चौक से, राजपथ, इण्डिया गेट, कर्जन रोड (अब कस्तूरबा गाँधी मार्ग) से कनाट प्लेस होकर मिंटो ब्रिज से रामलीला मैदान होकर, चावड़ी बाज़ार, किनारी बाज़ार पार कर चुकी थी और बस लाल किला सामने ही दिखाई दे रहा था. सड़क के दोनों तरफ खड़े और छतों पर चढ़े लोग रंगों से लबरेज़ जोशीली शानदार परेड का लुत्फ़ ले रहे थे. कुछ दी दूर दाहिनी तरफ गुरुद्वारा सीस गंज साहब था जिसके सामने पहुँचते ही सिख रेजिमेंट की टुकड़ी को कमांड कर रहे कैप्टन इंजो गाखल (इंदरजीत सिंह गाखल) ने गरजती आवाज़ में आदेश दिया – दाहिने देख. इसके साथ ही उन्होंने अपनी तलवार दाहिनी तरफ गुरुद्वारा सीस गंज साहब के सम्मान में श्रद्धा भाव से झुकाते हुए सलामी दी.

गणतंत्र दिवस
कैप्टन (बाद में ब्रिगेडियर) इंजो गाखल (इंदरजीत सिंह गाखल)

गुरुद्वारे से श्रद्धालु और सेवादार इस नज़ारे को देख थोड़े चौंक गए थे. ये उनके हाव भाव से भी दिखाई दे रहा था, बकौल परेड टुकड़ी कमांडर क्यूंकि ऐसा पहली बार हुआ था. और उसके बाद जो हुआ वो बेहद मजेदार था.

खैर गरुद्वारा सीस गंज साहब को पार करके अपना बचा हुआ तकरीबन आधा-पौना किलोमीटर का रूट परेड ने पूरा किया और टुकड़ी आराम करने के लिए जाने लगी. इस बार चौंकने की बारी सिख रेजीमेंट की उस टुकड़ी के जवानो की थी. असल में उनके स्वागत में गुरु का कड़ाह प्रसाद लेकर गुरुद्वारा सीसगंज साहब के सेवादार खड़े थे. सर्दी की सुबह, लम्बी परेड के बाद थके हुए जवान हों और उस पर भूख के कारण पेट में दौड़ते चूहे-ऐसे में गरमा गरम कढ़ाह प्रसाद से बड़ा सम्मान, इनाम और पवित्र पुरस्कार क्या हो सकता है. लेकिन घटना सिर्फ इतनी भर नहीं थी.

गणतंत्र दिवस
कैप्टन (बाद में ब्रिगेडियर) इंजो गाखल (इंदरजीत सिंह गाखल)

ऐसे बनी एक परम्परा :

24 जनवरी की रिहर्सल के बाद 26 को गणतंत्र दिवस की परेड वैसे ही निकली. इस बार फिर सिख रेजीमेंट की टुकड़ी के कमांडर ने आदेश दिया – दाहिने देख..! और अपनी तलवार सलामी देने के लिए गुरुद्वारा सीस गंज साहब की तरफ झुकाई ही थी कि वो हुआ जो तब परेड के इतिहास में नहीं हुआ था. ऐसा कि जिससे गुरुघर की परम्परा भी सेना की परम्परा में शामिल हो गई. इस बार गुरुद्वारे के सेवादार और प्रबंधक चौंके नहीं बल्कि चौंकाने के लिए खुद तैयार थे. उन्होंने टुकड़ी के गुरूद्वारे के सामने आते ही फूलों की जबरदस्त बारिश शुरू कर दी. और इसके साथ ही जयकारे गूंज उठे – बोले सो निहाल… सत श्री अकाल !

सैन्य शक्ति, शानदार रंग बिरंगी पोशाक में चौड़े सीने वाले जोशीले रण बाँकुरों की कदम ताल और उन पर गुरुद्वारे से पूरे श्रद्धा भाव से बरसाई जा रही खुशबूदार फूलों की पत्तियाँ- मन को मोह लेने वाला ये नज़ारा तब पहली बार लोगों ने देखा था लेकिन उस साल के बाद ये नज़ारा आने वाले बरसों में हरेक गणतंत्र दिवस परेड का अंग बन गया.

ब्रिगेडियर इंजो गाखल :

इस परम्परा की शुरुआत करने वाले इंजो गाखल भारतीय सेना से बतौर ब्रिगेडियर रिटायर हुए लेकिन आज भी पूर्व सैनिकों की सेवा में लगे है. चंडीगढ़ के पास पंचकुला में रह रहे ब्रिगेडियर इंजो गाखल अब पंजाब पूर्व सैनिक निगम (Punjab Ex servicemen Corporation – PESCO) के प्रबंध निदेशक हैं. ब्रिगेडियर गाखल को उस परेड का एक एक लम्हा याद है जिसका ज़िक्र करने पर वह खुश होते हैं. आखिर हो भी क्यो न! गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का तो हर किसी जवान का सपना होता है. एक ऐसा मौका जब देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख राष्ट्रपति को सलामी देने का. उस पर इन्जो गाखल तो खुद ऐतिहासिक सिख रेजीमेंट की टुकड़ी के तब कमान अधिकारी थे.

ब्रिगेडियर गाखल कहते हैं कि धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक भारतीय सेना बहुत हैं. सिख रेजीमेंट में भी ऐसा ही है. ये हमारो परम्परा का हिस्सा है कि जहां भी धार्मिकं या पवित्र स्थान हो वहां खुद ब खुद हम नतमस्तक हो जाते हैं.

गुरुद्वारा सीस गंज साहब :

गणतंत्र दिवस
गुरुद्वारा सीस गंज साहब

गुरुद्वारा सीस गंज साहब उस स्थान पर बनाया गया है जहां सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर शहीद हुए थे और धड से अलग हुआ उनका सिर गिरा था. वो तारीख 24 नवम्बर 1675 थी. गुरुतेग बहादुर अपने कुछ साथियों के साथ पंजाब के आनंदपुर साहब से दिल्ली आये थे ताकि लोगों के जबरन धर्मांतरण पर उतारू दिल्ली की सल्तनत पर राज कर रहे छठे मुग़ल बादशाह औरंगजेब को समझा सकें. उनके पास कश्मीरी पंडितों का जत्था मदद की उम्मीद लेकर आया था जिन पर औरंगज़ेब के हुकम पर अत्याचार किये जा रहे थे. इससे पहले कि गुरु तेग बहादुर और उनके साथी लाल किले तक जाते. उन्हें रास्ते में ही चांदनी चौक में शहीद कर दिया गया.

नये पुलिस कमिश्नर ने वीकेंड की रात दिल्ली की सड़कों पर गुज़ारी

दिल्ली पुलिस
नाके पर कमिश्नर

भारत की राजधानी दिल्ली की क़ानून व्यवस्था की ताज़ा ताज़ा कमान सम्भालने के पहले वीकेंड की रात में ही आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव थानों में अचानक जा धमके. रास्ते में जहां भी पुलिस नाका मिला या गश्त करते जवान मिले, उनसे बात की, दुःख तकलीफ और सुविधाओं के बारे में पूछा. कुछ तारीफ करके हौसला बढ़ाया तो कुछ को खबरदार भी किया.

दिल्ली पुलिस
गश्त करते जवान से बात करते कमिश्नर

सादा वर्दी में सड़कों पर निकले नये पुलिस कमिश्नर के साथ उनकी स्टाफ ऑफिसर डीसीपी वर्षा शर्मा थीं जो तमाम तरह की निर्देशों को पालन कराने के लिए उन्हें नोट करती जा रही थीं. पुलिस कमिश्नर बालाजी श्रीवास्तव ने आर के पुरम, साउथ कैंपस और दरियागंज थानों का दौरा किया. यहाँ वे उन नागरिकों से मिले जो शिकायत लेकर आये हुए थे, बालाजी श्रीवास्तव ने उन्हें एकीकृत शिकायत निगरानी प्रणाली (आई सी एम एस – ICMS) के बारे में बताया. उनकी शिकायत जानने के साथ साथ पुलिस कमिश्नर ने वहां मौजूद लोगों को ई – शिकायत (e – complaint ) के बारे में बताया जो दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर के जरिये घर बैठे बैठे ही की जा सकती है.

दिल्ली पुलिस
शिकायत लेकर आए लोगों से मुखातिब

दिल्ली पुलिस के कमिश्नर बालाजी श्रीवास्तव ने रात में गश्त करने वाले पुलिसकर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके कल्याण के लिए किये गए उपायों के बारे में पूछताछ की और तमाम जिलों के उपायुक्तों (डीसीपी) से इस पहलू को खुद देखने के लिए कहा ताकि बल की हौसला अफजाई में कमी न रहे.

दिल्ली पुलिस
रोड पर कमिश्नर

नये पुलिस कमिश्नर ने ऐतिहासिक लाल किले के सुरक्षा बन्दोबस्त की जांच की और उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर तक गये जहां, नये कृषि कानूनों के विरोध में किसान अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं.

दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस कमिश्नर दरियागंज थाने में,

पुलिस कमिश्नर का ये औचक रात्रि दौरा ट्रैफिक पुलिस में तैनात उन इन्स्पेक्टर पुष्पलता के लिए सुखद अहसास वाला रहा जिन्होंने 26 जनवरी को किसानों की निकाली ट्रेक्टर रैली के दौरान भीड़ से निपटने के लिए बेहतरीन काम किया. उस दिन इंस्पेक्टर पुष्प लता अक्षरधाम के पास तैनात थी और उन्होंने हालात से निपटने में साहस और सूझबूझ का परिचय दिया था.

दिल्ली पुलिस
थाने में कमिश्नर

नौशेरा का शेर जिसने पाकिस्तानी सेना का चीफ बनने का जिन्नाह का ऑफर भी ठुकराया

नौशेरा का शेर
तत्कालीन प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू के साथ नौशेरा का शेर

वो महज़ 12 साल का था जब गाँव में कुएं में डूबते बच्चे की जान बचाने की खातिर अपनी जान की परवाह किये बगैर कुएं में कूद गया था. यही नहीं सिर्फ 35 साल की उम्र में उसे एक देश ने अपनी सेना में शामिल होने और कालांतर में सेना प्रमुख बनाने का वादा भी दिया था लेकिन उसने उसी देश की सेना से मुकाबला करते हुए अपने को कुर्बान करना बेहतर समझा. उसे नाम मिला ‘नौशेरा का शेर’. यहाँ ज़िक्र हो रहा है भारतीय सेना के लिए गौरव बने शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जिन्होंने आज ही के दिन 3 जुलाई 1948 को शहादत पाई थी. शूरवीरता के लिए दूसरे सबसे बड़े सम्मान ‘महावीर चक्र’ से मरणोपरांत सम्मानित ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान सच्ची देशभक्ति और भारतीय सेना की उच्च श्रेणी की धर्मनिरपेक्षता की बड़ी मिसाल हैं. यही नहीं ब्रिगेडियर उस्मान रणक्षेत्र में शहीद का दर्जा पाने वाले भारतीय सेना के अब तक सबसे बड़े रैंक के अधिकारी हैं.

नौशेरा का शेर
नौशेरा की जंग का एक फोटो

पाकिस्तान सेना का ऑफर :

15 जुलाई 1912 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन बीबीपुर (वर्तमान मऊ) में जन्मे ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान भारतीय सेना के उन मुस्लिम अधिकारियों में से एक थे जिन्होंने, धर्म के नाम पर बांटे गये देश के उस टुकड़े पाकिस्तान की सेना में जाने से इनकार कर दिया था. धर्म से पहले देश या फिर देश ही धर्म है जैसी सोच के मालिक ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की रगों में खून से ज्यादा देशभक्ति बहती थी. पाकिस्तान के संस्थापक, 1913 से 1947 में पाकिस्तान के गठन तक मुस्लिम लीग के सदर और पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मुहम्मद अली जिन्नाह की तरफ से आये लालच भरे पैगाम को सिरे से ख़ारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि अगर मोहम्मद उस्मान पाकिस्तान की सेना का हिस्सा बन जायेंगे तो एक दिन उनको पाकिस्तान सेना का चीफ बना दिया जायेगा.

नौशेरा का शेर
ब्रिगेडियर उसमान को पैराट्रूपर ने सलामी दी

दबाव में नहीं आये :

दरअसल ब्रिगेडियर उस्मान उस समय 10 बलूच रेजीमेंट में थे और उसकी 14 बटालियन को कमांड कर रहे थे. भारत के बंटवारे के दौरान बलूच रेजीमेंट पाकिस्तान सेना का हिस्सा बन गई थी. एक मुसलमान अधिकारी होने के नाते ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान पर भी पाकिस्तानी सेना में शामिल होने का जबरदस्त दबाव था लेकिन उन्होंने खुद को इस दबाव से बाहर निकाल लिया था. इसके साथ ही उनका तबादला बलूच रेजिमेंट से डोगरा रेजीमेंट में कर दिया गया.

जमीन पर सोना :

यही नहीं 1947 में ही पाकिस्तान ने रियासती सूबे जम्मू कश्मीर पर कब्ज़ा करने के लिए पहले हथियारबंद कबीलाई लोगों को भेजा और फिर उनके सपोर्ट करते हुए पाकिस्तानी सेना ने 25 दिसम्बर 1947 को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण झंगर पर कब्ज़ा कर लिया. ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान जो उस वक्त 77 पैराशूट ब्रिगेड को कमांड कर रहे थे उनको 50 वीं पैरा कमांड करने के लिए झंगर भेजा गया था. उसी दिन मोहम्मद उस्मान ने कसम खा ली कि जब तक झंगर से पाकिस्तान की सेना को खदेड़ भारत का फिर से कब्ज़ा नहीं कर लेते तब तक चैन से नहीं सोयेंगे और सच में वह चैन से नहीं सोते थे. वह ज़मीन पर चटाई बिछा कर सोते थे, बिस्तर पर नहीं. जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यूँ तो उनका जवाब था कि पाकिस्तान के कब्जाये गये कश्मीर के उस हिस्से को वापस नहीं लेते तब बिस्तर पर नहीं सोयेंगे. ये कसम पूरी करने में उनको तीन महीने लगे लेकिन इस कसम को पूरा करने में उन्हें अपना सर्वोच्च न्यौछावर करना पड़ा.

नौशेरा का शेर
नौशेरा का शेर

नौशेरा का शेर :

1948 के जनवरी और फरवरी महीनों में ब्रिगेडियर उसमान ने नौशेरा और झंगर में पाकिस्तानी सेना पर तगड़े हमले किये. ये दोनों ही जगह सामरिक महत्व की थीं. नौशेरा को बचाने के चक्कर में लड़ाई के दौरान पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा. इस लड़ाई में भारत के 35 जवानों की जान गई थी लेकिन पाकिस्तान के तकरीबन 1000 जवान मारे गये और लगभग 1000 ही घायल भी हुए. इस लड़ाई के बाद ब्रिगेडियर उस्मान का नाम ही पड़ गया – नौशेरा का शेर.

पाकिस्तान ने रखा इनाम :

नौशेरा की हार से पाकिस्तान इतना बौखला गया कि उसने ब्रिगेडियर के सिर पर इनाम रख दिया. ऐलान कर डाला कि जो कोई भी ब्रिगेडियर उस्मान का सिर लेकर आएगा उसे 50000 रूपये का इनाम दिया जाएगा. इतना नाम होने और शान बढ़ने के बावजूद ब्रिगेडियर उस्मान अपने संकल्प पर डटे रहे.

तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा (जो बाद में भारत के सेनाध्यक्ष बने और रिटायर्मेंट के बाद फील्ड मार्शल भी बनाये गए) ने पश्चिमी कमांड का प्रभार संभाला था. तब उनकी देखरेख में सेना ने फरवरी 1948 के आखिरी हफ्ते में दो ऑपरेशन छेड़े. एक था झंगर और दूसरा ऑपरेशन पूँछ. इस बार भारतीय सेना की 19 वीं इन्फेंट्री ब्रिगेड उत्तरी रिज की तरफ आगे बढ़ी जबकि 50 पैरा ब्रिगेड ने उस पहाड़ी क्षेत्र को दुश्मन से खाली कराया जो नौशेरा- झंगर मार्ग के दक्षिण में था. आखिरकार दुश्मन को झंगर से खदेड़ दिया गया और भारतीय सेना ने अपना कब्ज़ा जमा लिया. पाकिस्तान ने झंगर में अपनी नियमित सेना को रणक्षेत्र में उतार दिया. ये मई 1948 की बात है. अबकी बार पाकिस्तान इतना बौखला गया कि उसने झंगर में जबरदस्त बमबारी शुरू कर दी. इसके बावजूद झंगर को ब्रिगेडियर उस्मान ने अपने हाथ से जाने नहीं दिया अलबत्ता ऐसे ही एक मुकाबले में बमबारी के दौरान हमले में उनकी जान चली गई.

नौशेरा का शेर
झंगर में ब्रिगेडियर उसमान की प्रतिमा.

शहीद का दर्जा :

सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा लिया. उन्हें आखिरी विदाई देने के लिए तत्कालीन प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य भी शामिल हुए. अपने जन्मदिन से 12 दिन पहले शहीद हुए ब्रिगेडियर उस्मान के आखिरी शब्द थे कि बेशक मेरी जान चली जाए लेकिन दुश्मन के हाथ में वो इलाका नहीं जाना चाहिए. राजकीय और सैनिक सम्मान के साथ इस शूरवीर ब्रिगेडियर को विदा करने के साथ ही सरकार ने महावीर चक्र से सम्मानित करने का एलान किया.

सेना में करियर :

मार्च 1935 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान सेना में भर्ती हुए मोहम्मद उस्मान को अप्रैल 1936 में लेफ्टिनेंट बनाया गया और 31 अगस्त 1941 में तरक्की देकर कैप्टन का ओहदा प्रदान किया गया.

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी वायु सेना के नये वाइस चीफ, मार्शल हरजीत अरोड़ा रिटायर हुए

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी
एयर मार्शल विवेक राम चौधरी ने भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख का पदभार संभाला

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी ने आज भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ़ एयर स्टाफ – vice chief of air staff ) का कार्यभार सम्भाला. उन्होंने आज (1 जुलाई 2021) ही रिटायर हुए एयर मार्शल हरजीत सिंह अरोड़ा की जगह ली है. हरजीत सिंह अरोड़ा 39 साल की सेवा के बाद भारतीय वायु सेना के वाइस चीफ के ओहदे से सेवानिवृत्त हुए हैं.

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी
अमर जवान ज्योति पर एयर मार्शल विवेक राम चौधरी

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी ने 1982 में भारतीय वायु सेना (indian air force) की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन हासिल किया था. उन्हें लड़ाकू विमान उड़ाने का जहां अच्छा खासा अनुभव है वहीं वह प्रशिक्षण में भी माहिर हैं. उन्हें प्रशिक्षक विमान उड़ाने का भी बेहतरीन तजुर्बा है.

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी
एयर मार्शल विवेक राम चौधरी को गार्ड आफ आनर दिया गया.

पश्चिमी एयर कमांड के चीफ रहे एयर मार्शल हरजीत सिंह अरोड़ा भारतीय वायुसेना के पुराने विमानों के साथ आधुनिक विमान की भी दुर्घटना रहित उड़ान का काफी अनुभव है. उन्होंने 11 दिसम्बर 1981 को भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में कमीशन हासिल किया था. मार्शल अरोड़ा को 1 अक्टूबर 2019 को वाइस चीफ ऑफ़ एयर स्टाफ बनाया गया था.

एयर मार्शल विवेक राम चौधरी
एयर मार्शल हरजीत सिंह अरोड़ा (बाएं) रिटायर हो गए.

दिल्ली स्थित वायु सेना मुख्यालय में एयर मार्शल अरोड़ा को परम्परागत तरीके से गार्ड ऑफ़ ऑनर (guard of honour) दिया गया और बाद में उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पर जाकर वीर शहीद सैनिकों को याद करते हुए पुष्पांजलि अर्पित की.

मुकुल गोयल यूपी के, स्यलेंद्र बाबू तमिलनाडु के और अनिलकांत केरल के डीजीपी

मुकुल गोयल
आईपीएस अधिकारी मुकुल गोयल यूपी पुलिस के महानिदेशक बने

भारत में 24 घंटों के दौरान दिल्ली के अलावा तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में पुलिस में शीर्ष स्तर पर बदलाव हुआ है. दिल्ली में जहाँ एसएन श्रीवास्तव की जगह बालाजी श्रीवास्तव ने पुलिस कमिश्नर ओहदा सम्भाला वहीं उत्तर प्रदेश में मुकुल गोयल को पुलिस महानिदेशक घोषित किया गया. केरल में अनिल कान्त पुलिस प्रमुख बने तो तमिलनाडु में सी स्यलेंद्र बाबू को महानिदेशक के तौर पर पुलिस की कमान सौंपी गई. सी स्यलेंद्र बाबू को आईपीएस जे के त्रिपाठी के रिटायर होने पर डीजीपी बनाया गया है. वह 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं.

मुकुल गोयल
मुकुल गोयल की उप्र के पुलिस महानिदेशक पद पर नियुक्ति का आदेश.
मुकुल गोयल
आईपीएस अधिकारी मुकुल गोयल यूपी पुलिस के महानिदेशक बने

जैसा कि अनुमान था, भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मुकुल गोयल को उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान सौंपी गई है. राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से परसों हुई मुलाकात के बाद कल शाम होते होते श्री गोयल के पुलिस महानिदेशक पद पर नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गये. यूपी के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी के 30 जून 2021 के आदेश में कहा गया है कि शासन द्वारा जनहित में लिए गये निर्णय के मुताबिक़ मुकुल गोयल को पुलिस महानिदेशक (विभागाध्यक्ष) के पद पर तैनात किया जा रहा है. अपर मुख्य सचिव की तरफ से पहले से ही टाइप करके रखे गये इस निर्देश पत्र पर तारीख ही बस हाथ से लिखी गई है. महीना और नाम आदि पहले से ही अंकित थे.

स्यलेंद्र बाबू
तमिलनाडु में सी स्यलेंद्र बाबू को पुलिस महानिदेशक बनाया गया है.

इसी के साथ ही यूपी में पुलिस महानिदेशक के पद पर अधिकारी की तैनाती को लेकर तमाम तरह का संशय दूर हो गया जो कल सुबह प्रशांत कुमार को सौंपे जाने के बाद ख़ास तौर से पैदा हुआ था.

अभी तक आईपीएस मुकुल गोयल सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में एडीजी के पद पर चंडीगढ़ में तैनात थे. पश्चिम उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले मुकुल गोयल का कार्यकाल अभी ढाई साल का बचा है. वह फरवरी 2024 में रिटायर होंगे. यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान मुज़फ्फरनगर में हुए दंगों के बाद अरुण कुमार को हटाकर हालात सम्भालने के लिए मुकुल गोयल को एडीजी (कानून व्यवस्था) बनाया गया था.

दिल्ली के अनिल कांत केरल के नये पुलिस प्रमुख, 7 महीने का कार्यकाल बचा है

एसएन श्रीवास्तव ने बालाजी श्रीवास्तव को दिल्ली पुलिस कमिश्नर की कुर्सी सौंपी

दिल्ली पुलिस कमिश्नर
बालाजी श्रीवास्तव ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर का अतिरिक्त पदभार संभाला.

भारतीय पुलिस सेवा के 1988 बैच के अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव ने आज (30 जून 2021) दिल्ली पुलिस के कमिश्नर के ओहदे का कामकाज सम्भाल लिया. भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी का कार्यकाल पूरा होने के बाद एस एन श्रीवास्तव ने फ़ोर्स को अलविदा कहा. नई दिल्ली में जय सिंह रोड स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय में उन्होंने अपनी कुर्सी पर बालाजी श्रीवास्तव को बिठाया और चार्ज सौंपा. दो कागजों पर दस्तखत करने के साथ ही बालाजी श्रीवास्तव ने नई ज़िम्मेदारी संभाली. हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कल जारी आदेश में कहा था कि स्पेशल कमिश्नर बालाजी श्रीवास्तव पुलिस आयुक्त का काम अतिरिक्त तौर पर देखेंगे. वह अगले आदेश तक इस काम को देखते रहेंगे.

दिल्ली पुलिस कमिश्नर
बालाजी श्रीवास्तव (बाएं) और एसएन श्रीवास्तव.

आईपीएस बालाजी श्रीवास्तव अब तक दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (विजिलेंस) के ओहदे पर ही थे. उन्हें एसएन श्रीवास्तव की जगह कार्यवाहक आयुक्त का पद सौंपे जाने का निर्णय अचानक तब लिया गया जब तय हुआ कि एस एन श्रीवास्तव को सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा जोकि अप्रत्याशित था. एक्सटेंशन न देने को उम्मीद के उलट सरकारी फैसला माना जा रहा है जोकि अचानक लिया गया. इस बाबत सोमवार को आदेश भी जारी कर दिए गए थे और मंगलवार को बालाजी को कुर्सी सौंपने की तैयारी भी हो गई थी.

अनुभवी अधिकारी बालाजी :

दिल्ली पुलिस में स्पेशल कमिश्नर बनाये जाने से पहले एजीएमयूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव 13 जनवरी तक पुदुचेर्री के पुलिस महानिदेशक थे. दिल्ली में ज़िला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) और आर्थिक अपराध शाखा के प्रमुख के अलावा कई ओहदों पर काम का अनुभव रखने वाले बालाजी श्रीवास्तव मिजोरम पुलिस के प्रमुख भी रहे. अंडमान निकोबार द्वीप समूह में भी रहे और उनको भारत सरकार की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW – रॉ) में भी काम करने का भी अनुभव है.

आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार यूपी पुलिस के कार्यवाहक डीजीपी, अवस्थी रिटायर हुए

आईपीएस प्रशांत कुमार
आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार उप्र पुलिस के कार्यवाहक महानिदेशक बने.

भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत कुमार भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक पुलिस निदेशक बनाये गये हैं. आईपीएस अधिकारी हितेश चंद्र अवस्थी के आज (30 जून 2021) रिटायर होने पर उनकी जगह प्रशांत कुमार को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया. प्रशांत कुमार अतिरिक्त महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) हैं और जब तक श्री अवस्थी के उत्तराधिकारी के तौर पर महानिदेशक के पद के लिए सरकार किसी अन्य आईपीएस अधिकारी का नाम तय नहीं करती, तब तक श्री कुमार ही राज्य के पुलिस मुखिया का काम सम्भालेंगे. वैसे महानिदेशक के ओहदे की दौड़ में तीन आईपीएस अधिकारियों नासिर कमाल, मुकुल गोयल और आरपी सिंह के नाम लिए जा रहे हैं लेकिन मुकुल गोयल की दावेदारी ज्यादा पुख्ता मानी जा रही है.

आईपीएस प्रशांत कुमार
आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार उप्र पुलिस के कार्यवाहक महानिदेशक बने.

पुलिस अधिकारी के तौर पर श्री अवस्थी ने 36 साल काम किया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईपीएस अधिकारी एचसी अवस्थी के कार्यकाल की तारीफ करते हुए कहा कि आईपीएस अधिकारी के रूप में उन्होंने अपनी लम्बी सेवावधि के दौरान एक अच्छे और तेज़ तर्रार अफसर के तौर पर देश और प्रदेश की सेवा की है.

आईपीएस प्रशांत कुमार
आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार उप्र पुलिस के कार्यवाहक महानिदेशक बने.

श्री अवस्थी के रिटायर होने की तिथि तय होने के बावजूद आज सुबह तक सरकार ये घोषित नहीं कर पाई थी कि, जनसंख्या के हिसाब से देश का सबसे बड़े राज्य की पुलिस का नेतृत्व किसे सौंपा जाये और किसे श्री अवस्थी का उत्तराधिकारी बनाया जाए. सुबह तक चर्चा ये ज़रूर थी कि श्री अवस्थी के बाद मुकुल गोयल को यूपी पुलिस के महानिदेशक की कुर्सी सौंपी जाएगी. श्री गोयल भारतीय पुलिस सेवा के उत्तर प्रदेश कैडर के 1987 के अधिकारी हैं. मंगलवार शाम को उनकी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में हुई मुलाक़ात को इसी नजरिये से देखा भी जा रहा है.

आईपीएस प्रशांत कुमार
घर पर योग करते प्रशांत कुमार.

मुकुल गोयल वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में अतिरिक्त महानिदेशक हैं और पूर्व में उत्तर प्रदेश पुलिस में एडीजी (क़ानून व्यवस्था) के पद पर भी रहे हैं. उनके अलावा यूपी पुलिस के महानिदेशक के ओहदे के लिए 1987 बैच के आरपी सिंह का भी नाम एक पात्र के तौर पर लिया गया है जो वर्तमान में एडीजीपी (ईओडब्ल्यू) हैं. वैसे वरिष्ठता के क्रम से 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी नासिर कमाल का नाम महानिदेशक के ओहदे की दौड़ में अव्वल नम्बर पर आता है. वह केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं.

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